आपन नजर काहे तु

0
331

आपन नजर काहे तु दुनीयाँ मे झुकइले बारु
हमसे मुहब्बत के बात सबसे छुपइले बारु
बड़ा दुख भइल तहार रहनीया देख के
बड़ा दीन बाद करेजा पर छुरी चलइले बारु,,
पीपरा के पेड़ तर के उ पहीला मुलाकात
पता ना केतना खातीर भुलइले बारु,,
भुला गइनी गीनती तहार आशीक गीने मे
तबो पता ना लागल केतना के रोवइले बारु.

एह पोस्ट पऽ रउरा टिप्पणी के इंतजार बा।

Please enter your comment!
Please enter your name here

18 − two =