एह पागल मन के गहराई…

0
261

एह पागल मन के गहराई…

जे दूर रहे, उ पास रहल
हर दम ओकरे,एहसास रहल

दू जिस्म रहे, एक साँस रहल
होठवा पे अइसन,प्यास रहल

जे पास बा, उ खास ना
ओकरा खातिर,एहसास ना

उ प्यार करे, फिर भी बात ना
ओकर बोली, बरदास ना

उ चली जाई, फिर याद आई
अंखिया फिर, आशु छलकाई

बितल बतिया, फिर दोहराई
के समझत बा, के समझाई

एह पागल मन के गहराई…

‘प्रवीण’

एह पोस्ट पऽ रउरा टिप्पणी के इंतजार बा।

Please enter your comment!
Please enter your name here

fourteen − 14 =