कबले फीची गवना के छारी

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चोरी करीहअ पपीउ चाहे खीचीहअ ठेलागाड़ी हमके साड़ी रे चाही,
कबले फीची गवना के छारी हमके साड़ी चाही,,
संग के सहेली हमर जीया तरसावेली
कीसीम कीसीम के साड़ी लहंगा झमकावेली,लहंगा झमकावेली..
अबे गठीयालअ ए बलम जी
अबे गटीयालअ बीहने बीहने धइ लीहअ गाडी़ हमके साड़ी चाही,
हमकेे साड़ी चाही
याद करअ कइ बरीस भइल मोरा गवना
नइहरे के साड़ी ओर्हना बीछवना,
भारी कंजुस रे बाड़ी…
भारी कंजुस हमर सास मीलल बारी
हमके साड़ी रे चाही कबले फीची गवना के साड़ी हमके साड़ी चाही,
करी का श्रीग्ार ना हथवा मे चुरी बा
चानी के अंगुठी बीना तरसत अंगुरी बा
भलही ना लागी ए बलम जी…
भलही ना लागी असओ घर मे केवारी हमके साड़ी चाही,कबले फीची गलना के छारी हमके साड़ी चाही,,
अबही ही ले जननी ना ससुरा के सुखवा
दीनानाथ पती पतीयालअ ना दुखवा
राही भरत दीहले आरे सपना उजारी,
हमके साड़ी रे चाही कवले फीची गवना के छारी हमके साडी चाही…..

एह पोस्ट पऽ रउरा टिप्पणी के इंतजार बा।

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