कैसे भुले दिघवारा की बाते

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कैसे भुले दिघवारा की बाते
जो मेरे दिल मे बसता था,
मै कैसे भुल जाउ वो गिलयाँ
जहा से मेरे घर का रास्ता था,,
वो एैनुल हक दादा समान
पारस जी मेरे चाचा समान
हर एक का बाबुजी से वास्ता था,,
स्टेशन मास्टर सत्तु चाचा
पापा को अबुल की खैनी भाता
काशी की खुरचन संग चाय दुकान
ये बबलु शर्मा करता कभी नास्ता था,,
नीरक्छना शीशु भवन स्कुल जहा
संघ साथ िबताए कुछ दोस्त जहा,
ये बबलु सोच सोच के हसंता था,,
कैसे भुले दिघवारा की बाते
जो मेरे दिल मे बसता था,

मीस्रा जी की मार जहा पर
धुरखेली जी की पाठ वहा पर,
होती रोज माँ की गुणगान जहा पर
है वो अम्बिका स्थान वहा पर,,
सबकी माँ के प्ित अटुट आश्था
मै कैसे भुल जाउ वो गलीयाँ
जहाँ से मेरे घर का रास्ता था
क्या वो वक्त इनसे स्सता था,??

एह पोस्ट पऽ रउरा टिप्पणी के इंतजार बा।

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