गाँव में अब का रह गईल बा?

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गाँव में अब का रह गईल बा? जे रहsता उहे जानी
कम दुर्दसा गाँव के नइखे इ रौउआ सभे मानी !!

अस्पतालन के उजडल छपर, टूटल छानी बा
टुटहा कल,भखड़ल ईनार के मटईल पानी बा !!

भायं भायं करत सगरो सुनसान रस्ता बा
कथित पाठशाला के हालत बहुते खस्ता बा !!

चौउपालन पर अब गाय गोरु के डेरा बा
खाली घरन में चमगादड़न के बसेरा बा !!

हक हिस्सा खातिर भाई -भाई में दुसमनी बा
नात रिस्ता कहे के रह गईल तनी-मनी बा !!

सुनात रहे जहाँ कजरी ,चईता,बिरहा ठाँव-ठाँव
अब हलकट जवानी के सोर बा सगरे गाँव !!

किसानन के उपज में कमाई से बेसी घाटा बा
सुख-सुविधा के नाम पे जीरो बटा सन्नाटा बा !!

कवनो अनचीन्ह से केहू ना पूछे नांव गाँव
जोहले ना मिली अब कउअन के काँव काँव !!

बेटा-पतोह सहर गईल बाड़े पावे वेतन भत्ता
माई बाबू जोहत बाड़े उनकर आवे के रस्ता !!

कसहूँ जे गाँव से सहर के पलायन रुक पाईत
आपन गाँव गवई फेर से गुलज़ार हो जाईत !!

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