जब बहे ला पवन पुरवाई

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जब बहे ला पवन पुरवाई
लेबे अमवा के पेड़ अंगडाई…….
झूमे धईके अंखवरिया हो
मोर खेतवा बघरिया हो …….
गउआ के लोग बाड़ा लागे पयार पयार
होखेला बात ईहवा सब खारा-खारा
आपस में प्यार सभ बांटे
गजबे बहार ईहा बाटे हो हो हो
शहर में कहा अईसन मिलिहे नजारा,………
हम भूले नाही पाई लडिकाई
कबो गाई कबो बकरी चराई………
रहे बचपन के उमरिया हो
मोर खेतवा बघरिया हो……
गउये में कही हमार दिल बा भुलाईल
ऊंखिया रहरिया में मन अझुराईल
सोहे मकई के खेतवा मचानी
बाटे छावल दुअरा के छानी हो हो हो
माटि वाला घर देखि मन अगराईल……..
लोग रहे ईहा लाई के मडईया
बड़ा निक लागे तलवा तलिया……..
मलहवा मारे मछरिया हो
मोर खेतवा बघरिया हो ………

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