पताका झाप रोज बजार

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पताका झाप रोज बजार से मंगवावे ला
ना मीले पे चारमीनार से काम चलावेला,
इ उहे दादी हमार बचपर के संघाती हीय
गाँव के सब पंचाइत छने मे सुलझावेला
बाकी इनकर आदत बड़ा खराब परल बा
जही तही इ बीडी सीगरेट सुलगावेला,,
लाज से हम बोल ना पाई कउनो बतीया
बीरी के िसकाइत सुन छुट्टे मुह गरीयावेला

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हमार खुशहाल जीवन,जहा कोइ दुिनयाँदारी ना ह,
अपना धुन मे मगन,ए जगहा केहु के सरदारी ना ह,
लौट ना पाइ इ समइया, जहा गउआ में कटल समइया
छुआ छुत त दुर,जहा प्यार के छोड़ कउने बेमारी न ह

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शादी के लड्डु,,
जे खाए उहो पछताए
जे ना खाए उहो पछताए,,

पुरी बुनंदीया चपले लोग जे बन के गइल रहे बराती,
उही जगह से होए लागल भाई हमार बरबादी,
पंडीजी के सात वचन हमार मेहरारु के पाले ना परल,
पता ना कउन नछत्र मे उनका से भइल रहे हमार शादी……

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कोइ का जानी शहर मे कइसे रहाला
पाँकिट के दुध इहा घरे मठ्ठा महाला,
पाउडर के मीठाई, आ पावडरे के मलाई
एकरे के भइया शहर के जिनगी कहाला,,
करना के दही घरे,इहा मीले मारल मलाई
खाये घरी ही घर के सुरतीया बुझाला,,
घरे गाँय दुअरा इहा रहे कुड़ा घरवा
गायो लोग के ना शहरीया सोहाला,,
एकरे के भाई शहर के जिनगी कहाला….

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सुख मे रहनी बलम जब रहे झोपरीया
सब सुख िछनले मोह से महल अटरीया,
माटी के महक नाही बसे मोरा घरवा
फी्रीज के पानी मोरा पकरे गरदिनया,,
छोड़ी इ िटबा िटबी, छोड़ी कुलर के हवा
बलम फेरु बना दी एगो सुधर पलिनया..

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के जइहें सोनपुर के जइहें पटना-2,
अरे के हो जइहें ना-2,
हाजीपुर कचहरियाँ के हो जइहेँ ना….

ससुर जइहें सोनपुर,भसुर जइहें पटना-2,
अरे कि सईयाँ जइहेँ ना-2,
हाजीपुर कचहरियाँ, सईयाँ जईहेँ ना……..

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जइसे जइसे बढी डीजल ओइ से बढी मंहगाई
पर परेशान मत होइ रउआ मत करी घर मे लड़ाई,
खान पान,रोटी,चावल सब सपना मे सस्ता भेटाई,,
कइसे करम जग परोजन मुठ्ठी भर पइसा लेहके
इ बीपतीया से अब के हमके छुटकारा िदलवाई,,?
बैड,बाजा,गाड़ी के साटा इतना पइसा से कइसे बंधाई
जमाना बदले से मुस्कील भइल घरे लावल लुगाई,,
कइसन चुननी नेता आपन जे भइले अब कसाई,?

एह पोस्ट पऽ रउरा टिप्पणी के इंतजार बा।

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