बटोही बढत चलs

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जिनगी हs अभियान बटोही बढ़त चलs।
पोथी हs परधान ध्यान से पढ़त चलs।।
डगरी के हर डेग-डेग डरवावन बा
लोभ लाभ के लफड़ा बड़ा लुभावन बा
होत परीछा बा इच्छा के पल-पल पर
आसा के असवासन बड़ा सुहावन बा
ऊबड़-खाबड़ अड़बड़ बड़ा चढ़ाई बा

मंजिल बाटे ऊंच संभल के चढ़त चलs।
जिनगी हs अभियान बटोही बढ़त चलs।।
अनगीनत बा राह लगावल लोगन के
जघे-जघे भण्डार भरल बा भोगन के
साफ-साफ नयना के लागल अयना बा
छलकsताटे रस रसना में रोगन के
बड़ विवेक के सयना बा तहरा संघवा

अपना खातिर अलगे रहिया गढ़त चलs।
जिनगी हs अभियान बटोही बढ़त चलs।
सुध से कवनो बात ने केहू सुनी कबो
रहिया के रोड़ा ना केहू चुनी कबो
केहू तहपर दया दिखावे आई ना
सही-सही गुनवो ना केहू गुनी कबो
अपने बल बूता के सिरिफ भरोसा बा
संकट जेजे सोझा आवे लड़त चलs।

जिनगी हs अभियान बटोही बढ़त चलs।।
कहियो हिम्मत हार कहीं पर रुकिहs मत
बाधा आई बहुत कहीं पर झुंकिहs मत
लदर-बदर तूं भले लहू से हो जइहs
केहू के लग जाके कबो कुहुकिहs मत
हंस-हंस के सब हंसी उड़ेवाला जग में
मुदई के तू मुंह पर घुस्सा जढ़त चलs।
जिनगी हs अभियान बटोही बढ़त चलs।।

एह पोस्ट पऽ रउरा टिप्पणी के इंतजार बा।

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