लमहर शहरिया के

0
720

लमहर शहरिया के
ऊँची अटारी
जवना के ईटा ईटा बेमार बा
झूठ के बेमारी से
पथ्थल के माकन में
धोखा के दोकान
बेचवईया/ कठकरेज
लूटे में ना तनिको परहेज
एही में कहीं लुकाईल बाडे
कलुवा/ ललुवा
चोकट/ धरिछन /संकटा
जेकर हियाव रहे दरियाव नियर
आधा बाँट के खाय लोग
दुःख सुख में
धधा के परे लोग
एक दोसरा के खातिर
कंकरीट के जंगल में
ना जाने कहवां दबाईल बा सभे
भुलाईल बा सभे आकि
शहरुवा चाल के जाल में
फंस गइल लोग
ना जानी
केतना धंस गइल लोग
ईहवा आके।।

एह पोस्ट पऽ रउरा टिप्पणी के इंतजार बा।

Please enter your comment!
Please enter your name here

17 + 6 =