सांस खातिर सरगम बेगाना भइल

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जगरनाथ(जगन्नाथ) जी के लिखल गज़ल जवन कि सन १९७७ में छपल रहे…

सांस खातिर सरगम बेगाना भइल
जिंदगी बस जिये के बहाना भइल
गिर के उनका नज़र से उठल बानी हम
बानी सबका नज़र के निसाना भइल
लोर पिए के जनमे से लागल लकम
अब ना छुटी निसा ई पुराना भइल
उनका रोवला बुला एगो मुद्दत भइल
हमरा हँसला, ए यारे, ज़माना भइल
रउवा दिहीं दरद ना, गज़ल देब हम
इ गज़ल रउवा नाँवे बयाना भइल…

एह पोस्ट पऽ रउरा टिप्पणी के इंतजार बा।

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