हियरा में उठत हिलोर

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हियरा में उठत हिलोर,पिया हो,
अइसे जनि ताकऽ
लहके अगिन पोरेपोर,पिया हो,
अइसे जनि ताकऽ
छुइ जाला देहिया,अङरि जाला मनवां
छोट लागे घर,छोट लागे असमनवां!
प्रनवा के देला झकझोर,पिया हो,
अइसे जनि ताकऽ!
मनवां में मचत मरोर, धनी तूँ,
धरतिया न ताकऽ!
भूलि जाला बेद,भूलि जाइले पुरनवां!
मोरे अंकवारी नाहीं आंटेला जहनवां!
चनवां के देखेला चकोर, धनी तूँ,
धरतिया न ताकऽ

एह पोस्ट पऽ रउरा टिप्पणी के इंतजार बा।

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