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Monthly Archives: December 2014

संजय सिंह

भोजपुरी गजल

उ काठ के करेजा बरबस छलक पड़ल, टूटल रहे सिन्होरा ,मिटल रहे भरम । पपनी के लोर में रहे ,उलझल जे मन के नाव, पतवार के उमंग...
ई हरनाकुस मन

ई हरनाकुस मन: भोजपुरी कविता संग्रह

ई हरनाकुस मन (भोजपुरी कविता संग्रह) के कुछ लाइन भोजपुरी में हम सन १९५० से लिख रहल बानी। पहिले गीत बहुत लिखत रही, जवना मे...
अनिमेष कुमार वर्मा

केंवार बंद करके

केंवार बंद करके सब केहु राखेला ना केहु आओ, ना अपने जाएके कबो कुछ भईल त खाली मोका में मुड़ी निकाल झाकेला जईसे एगो पीसाच बा बईठल हाँथे लेहले...
अक्षरा सिंह और खेसारी लाल यादव ने किया शादी !

अक्षरा सिंह और खेसारी लाल यादव ने किया शादी !

सूत्रों के हवाले से खबर मिली की अभिनेत्री अक्षरा सिंह और खेसारी लाल यादव ने भोजपुरी फिल्म निरहुआ रिक्शावाला -2 के सेट पर दोनों...
नबीन कुमार 'भोजपुरिया'

पीके (PK)

एह सिनेमा के बारे मे हम पिछिला एक साल से सुनत आ पढत बानी , कबो आमिर खान भोजपुरी बोलिहे त कबो भोजपुरी...

हवा दुनू चली बाबा

मोहब्बत आ नफरत के हवा दुनू चली बाबा तब नू ओह गली में दाल हमनी के गली बाबा उ तहरा के मुआई फेर हमरो जान ली...
चन्दन कुमार सिंह

ना चाही हमरा ई पैकेज

ई पिछले साल के बात ह, हमहुँ दिळी से दिवाली आ छठ पूजा तक के छुटी लेके घरे पहुँचल रहनी, बड़ा बढ़िया लागत...
भोजपुरी लोक संस्कृति : संतोष पटेल

का लाल : भोजपुरी कविता

नागार्जुन के मैथिली कविता की लाल? की लाल? के भोजपुरी अनुवाद का लाल? का लाल? अड़हूल के फुल लाल ! आरती के पात लाल ! तिरकोल के फल...
चन्दन सिंह

खोल

खोल, बाह्य आवरण के कहल जाला । ई प्राकृतिक आ कृत्रिम दुनो प्रकार के होला , जइसे- घोंघा के खोल, रजाई-तकिया के खोल आदि...
श्वेताभ रंजन

मन काँव-काँव करके बोलावेला

काल आँगन के कोन से उ बोलवत रहे काँव-काँव करके आवाज़ लगावत रहे सर्दी के काली रात से सूरज निकल के ओस के समंदर...
संजय सिंह

भिखारी ठाकुर के बिरहिन

दुनिया के लगभग सब भाषा के साहित्य अपना अँकवारी में विरह , दर्द ,आह के समेटले बा । इहे ना अलग अलग भाषा के...
संजय सिंह

भिखारी ठाकुर के सामाजिक कुरीतियन पर चोट

भिखारी ठाकुर के सामाजिक कुरीतियन पर चोट कवनो जनरीति के जब सामाजिक मान्यता मिला जाला त उ रूढ़ी बन जाले । जब पीढी दर...
धनंजय तिवारी जी

परदेसिया

परदेसिया “ट्रेन के का पोजीशन बा” बलराम व्यग्रता से पूछले. “बाबूजी ट्रेन त एक घंटा लेट बिया.” बलराम के बेटा रमेश जबाब देहले. “एहिजा एक घंटा लेट...
हिमांशु भूषण पाण्डेय

सीवान के बुढ़िया माई

सीवान के बुढ़िया माई - सबकर मनोकामना पूरन करे वाली माई सीवान के ऐतिहासिक गांधी मैदान के उत्तर-पुरुब की ओर जाये वाला रास्ता में स्थापित...

ई शहर

का भईल जे सुने के खरी-खोटी देला सहरवे हs जे पेट के रोजी-रोटी देला जाके मिल में, तू लाख बुनs कपड़ा ढके खातिर देह, खाली...
नबीन कुमार 'भोजपुरिया'

भिखारी ठाकूर के मुडि प छत काहे नईखे हो ?

दुकानदार - जब बात कई के खलिहा बतियाई के झारखंड कश्मीर महाराष्ट्र पंजाब आ कवनो देश राज्य जीतल जा सकेला त फेरु काम करे...
ज़ौहर शाफ़ियाबादी

होला कबो बहार त पतझड़ जमीन पर

होला कबो बहार त पतझड़ जमीन पर लीला ई रोज देखेला अँखिगर जमीन पर अँखिया में अँखिया डार के कहलें ऊ अनकहल नेहिया के फूल खिल गइल...
अनिमेष कुमार वर्मा

ढेर दिन हो गइल

ढेर दिन हो गइल बिना एलार्म के नींद खोलाइल सबेरे उठ के दुअरा बइठ के चाह पिअल, अखबार पढ़ाईल ढेर दिन हो गइल, बिना बतावले केहु के, घरे जाईल बिना...
प्रभास मिश्र

मंदिर मे दुसाध

ए धनेसरी , तनी ते अपना सोड़वा (सरफ) में से दे त। देख ना चार -पांच हाली त खूबे रगड़-रगड़ के फींच लेनी बाकिर...
देवेन्द्र नाथ तिवारी

सेमर के फूल

एगो छोट बच्ची के दुआरे प एगो सेमर के विशाल गाछ रहे. ओह घरी इहे बसंत के महिना चलत रहे. सेमर के फूल दिन...