आगे नाथ ना पाछे पगहा

अइसन कहावत निरकुंश आदमी के बारे में कहल जाला। निरकुंश आदमी आहे साँढ़ अइसन स्वछन्द होला जेकरा नाक में ना नाथ होला ना ओकरा गरदन में नाथ के पीछे पगहा होला । नाथ आ पगहा भइला से जानवर वश में रहेला। एही तरे जवान आदमी पर उत्तरदायित्व के न बोझा होखे ना केहू के नियंत्रण में होखे त आदमी नाथ-पगहा विहीन पशू जइसन व्यवहार करे लागेला।

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