आखिर केतना

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हंसी हंसी कबले केतना बात सही हमनी
दुनिया के एकतरफा घाट सही हमनी

सहकल बहकल लोगवा के बा सह पर सह
आखिर कबलें केतना मात सहीं हमनी

कूड़ा करकट उडि के आँख पीरावत बा
बेसुरन के गीत ग़ज़ल भरमावत बा
गंगा जल पर नामे कहें लिखाइल ना
कबले नाली के आघात सहीं हमनी

सहलो के एगो लछुमन रेखा होला
नीमन बनल रहे के कुछ लेखा होला
ठीक हवे की बरियारे के दोष ना ह
अब उनकर केतना उत्पात सही हमनी

धोका के रोटी जे बांटे दानी बा
छली के दुनु हाथे सोना चानी बा
सुख के फूटल कउडी ना हमरा पाले
कहिया ले करिखाही रत सही हमनी

सभे कहे हमरे के धीरज मत छोड़ ऽ
आपन धीर धरम के धरा मत मोड़ ऽ
लह लहर त ऽ समय के हम सहते बानी
विपत के केतना बरसात सही हमनी

लेखक़ परिचय:-
नाम: डा. गोरख प्रसाद मस्ताना
जनम स्थान: बेतिया, बिहार
जनम दिन: 1 फरवरी 1954
शिक्षा: एम ए (त्रय), पी एच डी
किताब: जिनगी पहाड़ हो गईल (काव्य संग्रह), एकलव्य (खण्ड काव्य),
लगाव (लघुकथा संग्रह) औरी अंजुरी में अंजोर (गीत संग्रह)

एह पोस्ट पऽ रउरा टिप्पणी के इंतजार बा।

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