अब कइसे बबुआ नमाज पढ़े जइहें

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अइसन भइल चीर-फार
मिटी गइल आर – पार
अब कइसे बबुआ नमाज पढ़े जइहें ||

टभकेले रोज रोज मन के दरदिया
बाबा के नावें से लागे सरदिया
सपनों में मोदिए के

नउवाँ बरइहें || अब कइसे — — —

भइया के जोरे उतान रहन अब ले
बहुते मुफुत के मलाई ऊ चभले
साथी संघतिया

नजरिया फेरइहें || अब कइसे — — —

घरवों में दुर – दुर , बहरवों में दुर – दुर
नाचत मोर इहाँ , अंइखत बा घूर घूर
जाने कब राहिल

तखत लेइ जइहें || अब कइसे — — —

हुक्को पर आफति बा,बन होइ पानी
सँभरे बलूचे ना , कश्मीरो मानी ?
अब करबs कुछहू,

तs भुभुनो फोरइहें ||
अब कइसे बबुआ , नमाज पढ़े जइहें ||

पतोह का निबाही के लेखक का परिचय:
जयशंकर प्रसाद द्विवेदी
इंजीनियरिंग स्नातक ;
व्यवसाय: कम्पुटर सर्विस सेवा
सी -39 , सेक्टर – 3;
चिरंजीव विहार, गाजियाबाद (उ. प्र.)
फोन : 9999614657
ईमेल : [email protected]
फ़ेसबुक : https://www.facebook.com/jp.dwivedi.5
ब्लॉग: http:// dwivedijaishankar.blogspot.in

एह पोस्ट पऽ रउरा टिप्पणी के इंतजार बा।

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