अबरा के मेहरारू गाँव भर के भउजाई

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कमजोर के मेहरारू से सभे माज़क करेला। अइसन बुझाला जे सारा समाज ओकर देवर लागत होखे आ ओसे माज़क कइल आपन अधिकार बुझात होखे। ओकर पति जदि सबल होइत त दोसर लोग ओकरा मेहरारू से मज़ाक से डेराइत। दूबर भइल से केहू ओकरा मेहरारू के कुछ गुदानत नइखे। कहल जाला, लोग त लोग, कमजोर के दइबो सतावेलन।

कमजोर के समान, चीज प सब केहू आपन हक जतवेला।

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