भोजपुरी फ़िल्मो के कुछ अभिनेता…निर्माताओ और अभिनेत्रियो का शोषण करते है

Bhojpuri Actress Exploited
Bhojpuri Actress Exploited

आज के नये निर्माता को कुछ गिने चुने निर्देशको के द्वारा ज़्यादा धन कमाने का प्रलोभन दिया जाता है ! उन को गुमराह किया जाता है ! जब की सच्चाई यही है की बहूत से कम निर्माता लोग वापस फिल्म बनाते है ! कुछ तो ऐसे निर्माता लोग रहे है जिन का फिल्म इंडस्ट्रीस मे किसी कथित बड़े स्टार को ले क फिल्म करने से वो मौत के गले मे समा चुके है ! यहा तक की लगतार जो फ़िल्मे फ्लॉप होती जाती है उन को दिखाया जाता है की वो सूपरहिट है ! सिनेमाहाल मे जा के देखे तो सच्चाई की कुछ और होती है ! हर एक निर्माता अपनी फिल्म को सूपरहिट बताता है बेसक वो पूरी तरह से बर्बाद हो चुका हो!

एक बहूत बड़ा सवाल होता है निर्माता का भोजपुरी फिल्म बनाने से पहले की वो फिल्म कैसे करे की वो दुबारा फिल्म बना सके ? जवाब मे कुछ लोग लाइन से नाम गिनना शुरू कर देते है की की दिनेश जी, ख़ेसारी जी, पवन सिंह, रानी जी, और अब तो लोग विराज जी का नाम लेना ही बंद कर दिया है ! और लोगो की तो गिनती ही नही करते है !

लेकिन अगर लाइन से देखा जाए तो सब से ज़्यादा फ़िल्मे कुछ गिने चुने लोगो की ही रुकी है जो रिलीस नही हो रही है ! या निर्माता तो पूरी तरह से डर है की उस का नुसकान निस्चित है !

ये बात किसी से छुपा नही है की निर्देशक राजकुमार आर पांडे के द्वारा अभिनेता प्रदीप पांडे चिंटू को ले के निर्देशित फिल्म “जीना तेरी गली मे” ने काफ़ी अच्छा बॉक्स ऑफीस पे रिकवरी हुआ है ! लेकिन उन कुछ लोगो ने जो नाम गिनाए है उन मे से कोई नाम नही है इस मे ! इस का मतलब क्या है आप सब भी समझ सकते है !

दिनेश जी , पवन सिंह , रानी चटर्जी के अभिनय के तो हम दीवाने है ! अच्छा लगता है इन की फ़िल्मे देखना ! लगता तो पहले ख़ेसारी लाल जी का भी था ! लेकिन अभी इन की फिल्म देखने के लिए बहूत सोचना पड़ेगा !

और कुछ अभिनेता लोगो से आग्रह है की जब उन को निर्माता अपनी फिल्म के लिए अनुबंधित कर ले तो कृपया अपने हिसाब से कुछ उन को परेशान ना करे या अपने कमिशन के चक्कर मे बेचारे निर्माता को बलि का बकरा ना बनाए ! कई ऐसे अभिनेता है जो अभिनेत्रीओ को फिल्म दिलाने के नाम पे उन का शोषण करते है ! और वो कहते है की वही अभिनेत्री रहेगी तो वो काम करेंगे ! या फिर कुछ कथित म्यूज़िक डाइरेक्टर ही रहेंगे तो वो कार्य करेंगे ! या फिर सिर्फ़ उन का ही लेकिन उन को ही केंद्रित रख के कहानी लिखेगा तो तो फिल्म करेंगे ! अभिनेत्रियो का क्या दोष वो तो आती है कार्य करने लेकिन कुछ अभिनेता लोग सामने वाली अभिनेत्री को अपनी जागीर समझते है ! बहोट सी बाते है इस भोजपुरी फिल्म इंडस्ट्रीस मे धीरे धीरे सब उजागर किया जाएगा! इसी वजह से भोजपुरी फ़िल्मे पतन के राह पे जाती हुई नज़र आ रही है !

देखियें:

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