अधिया पर ढ़ेला ढोवल

बहुत आदमी बिना मतलब के दोसरा के बात पर जाला। आइसन लोग आधा मजूरी लेके ढेला ढोवेला। ढेला ढोवल एगो श्रम साध्य कार हवे जेकरा खातिर ढेर मजूरी अपेक्षित बा, बाकिर दोसर के बात मे अनपेक्षीत डंग से रस लेवे वाला के ई मनोवृति होला की बे बोलवाले केहू के बात मे कूद के पर जाला। समाज में आईसन लोग के आनादर के नज़र से देखल जला।

जबरजस्ती के केहू के बात में टांग अड़ावल।

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