अगिया लगाय छँवड़ी बर तर खाढ़

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कवनो लइकी झगरा लगा के उहाँ से हट जा आ गाछ के नीचे खड़ा होके तमासा देखे लगे। इहाँ लइकी समाज मे रहे वाला चुगुलखोरन के प्रतीक बा, जेकर पेसा चुगली कइल आ झगरा लगवल बा । अइसन लोग देश आ समाज के खातिर घातक होला। ई लोग आगो लगावेला, तमसो देखेला। आज कल्ह दोसरा के घर फूँक के तमसा देखे वाला लोग समाज मे ढेर बा।

एह पोस्ट पऽ रउरा टिप्पणी के इंतजार बा।

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