डॉ. हरेश्वर राय जी के लिखल अइसन करिह जनि नादानी

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गउआँ छोड़ि शहर जनि जइह
होइ ख़तम निशानी
जवानी खपि जाइ बचवा,
अइसन करिह जनि नादानी
जवानी खपि जाइ बचवा I
खेत छुटि खरिहान छुटि
आ छूटिहें बाबू माई,
अंगना दुअरा सब छुटि जइहें
छूटिहें छोटका भाई,
फूट-फूट के रोइब बबुआ
हो जइब बेपानी
जवानी खपि जाइ बचवा।

गली गली मीरजाफर ओहिजा
चउक चउक जयचंद,
टूँड़ उठवले बिच्छी मिलिहें
फू फू करत भुजंग,
चउबीस घंटा होइ पेराई
होइ कमर कमानी
जवानी खपि जाइ बचवा।

लटपटियन के फेरा में तू
बबुआ जब परि जइब,
दिने तरेगन लउके लागी
ओका जस मुँह बइब,
बाप बाप चिचियइब बाकिर
केहुओ ना पहचानी
जवानी खपि जाइ बचवा।

बासी बासी भोर मिली
अरूआइल साँझ उदास,
पाँख नोचाइल चिरईं बनब
भुइँया गिरी आकाश
आन्हर गूंग बहिर होइ जइब
होइ ख़तम कहानी
जवानी खपि जाइ बचवा।

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