डॉ. हरेश्वर राय जी के लिखल अँखियन के आकाश सूना हो गइल

0
97
डॉ. हरेश्वर राय जी
डॉ. हरेश्वर राय जी

अँखियन के आकाश
सूना हो गइल |

सब तारा भइलन स खेत
सपना सब भइलन स रेत
पंखियन के परिहास
चूना हो गइल |

खेतवन प पाला पड़ल
पेटवन प भाला गड़ल
ख़ुशीयन के बनवास
दूना हो गइल |

बंसवारी के शामत आइल
फुलवारी प आफत आइल
कलियन के खरवांस
चौगुना हो गइल |

फेंड़ छोड़ के भगले तोंता
उजड़ गइल बा उनकर खोंता
डलियन के संत्रास
सौगुना हो गइल |

एह पोस्ट पऽ रउरा टिप्पणी के इंतजार बा।

Please enter your comment!
Please enter your name here

14 − 8 =