अँगुरी पकड़त-पकड़त पाहुँच पकड़ल

सिकार धीरे-धीरे फँसावल जाला। अँगुरी से सुख करिये के कहु के पाहुँच पकड़ल जाला। सुरू मे थोड़ा अधिकार जता के धीरे-धीरे अपना चतूराई से सवांग पर अधिकार कर लेवे वाला लोग के प्रति ई उक्ति कहल गइल बा।

धीरे धीरे केहू के कउनो सामान प आपन अधिकार जमवाल

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