अन्हरा सियार के पाकूहो दूलम

0
119

जीविका उपारजन करे के समरथाय ना रहला पर जिंदगी जिये खातिर साधारन चीज़ो दुर्लभ हो जला।
सियार जदि अन्हर हो जाए त ओकरा पीपर-पकड़ी के गाछ के गोदो दुर्लभ हो जाला। भोजपुर मे बर पीपल आ पकड़ी के फर के कही-कही गोदा आ कही-कही पकूहा कहल जाला।

जब आदमी कउनो काम करे के लायक ना होला भा असमर्थ होला त आसान कामो बड़ा कठिन बुझाला।

एह पोस्ट पऽ रउरा टिप्पणी के इंतजार बा।

Please enter your comment!
Please enter your name here

eight − 3 =