अपना भूख त चुल्हा फूँक, सैंया के भूख त कपरे दुखे

अपना भूख लगला पर घरनी खाना पका ले ली, बाकिर पतिदेव के भूख लगला पर कपरबथी के बहाना करेली | घरनी समाज कें स्वार्थी लोग के प्रतिनिधित्व करतारी, जे आपन स्वार्थ साध के अलग हो जाला आ अपने आदमी छोड़ देला।

आपन दुःख दुःख दोसर के दुःख कुछउ ना।

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