समाजिक कुरूतियों पर प्रहार करती औसत मनोरंजक फिल्म है रानी नंबर 786

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कल नवरंग सिनेमा अँधेरी (वेस्ट) मे रात्रि के 9 बजे रानी नंबर 786 का शो देखने के लिए मै एस.एस फिल्म फैक्ट्री की संचालिका-शाहजहान शेख़, लेखक-लाल जी यादव, गीतकार-सागर परदेसी, मॉडल व अभिनेता-आदित्य मोहन और भी दो लोग थे. सिनेमा हॉल मे फिल्म के अभिनेता विजय वर्मा भी थे. फिल्म शुरू होती है बेटे की चाहत रखने वाले बाप से जो जब-2 बेटी पैदा होती है तब-२ नदी मे फेकवा देता है. एक और शीन आता है शराबी का जो शराब के नशा मे इतना चूर नजर आता है की बच्चे उसके ग्लास मे पेशाब भी कर देते है तो पी लेता है, पेशाब भी उसको शराब ही लगता है. मसाज पार्लर मे अतरिक्त सुविधा के नाम पर लूट या यह कह सकते है की मसाज पार्लर के नाम पर वेश्या वृति. शुरवाती आइटम गर्ल को एक बार देखने का मन करता है लेकिन आइटम गर्ल का बॉडी फिगर इतना हेवी है कि ठीक तरह से डांस भी नही कर पा रही थी अगर वो अपनी बॉडी फिगर सही कर ले तो आइटम गर्ल का अच्छा काम कर सकती है।

फिल्म मे एक सीन आता है सदर अस्पताल सिवान का, मै खुद सिवान का हु जो लुक अस्पताल का दिखा, इतना तो कह सकता हु सदर अस्पताल सिवान का सीन नही है. भ्रम पैदा करने वाले सीन ना डाले तो अच्छा होगा. जिस तरह एक और सीन ढकनपुर थाना सिवान का रखा गया है उसी तरह सदर अस्पताल का नाम बदल के बदले और कोई नाम रख लेते, क्यों की ढकनपुर थाना भी सिवान मे नही है. एक दो जगह एडिटिंग का भी प्रोब्लम दिखा. इंटरवल से दो-तीन मिनट पहले एक सीन आता है रानी चटर्जी के साथ वाली नायिका गलत धंधा छोड़ के लिपिस्टिक,पाउडर बेचने जाती है शॉट कपड़े मे। क्या मिडिल टाउन मे लड़कियां शॉट कपड़े पहन के जाती है समान बेचने? निर्देशक महोदय आप ने कहा देखा है? वैसे तो आज कल हर नई अभिनेत्री रानी को फॉलो करती है रानी है भी इस लायक है, लेकिन इस फिल्म मे रानी अपने वेट के वजह से डबल लगी, रानी अगर अपनी बॉडी फिगर (यह बात रानी खुद महसूस भी करती होगी) ठीक कर ले तो रानी फिर से रानी लगेगी. एक गाना है रानी और विजय के ऊपर जहा रानी बोलती है “हमार छैला बा रहेठा, हम त बानी बुलडोजर” लगता है इस बात को रानी भी समझ गई है?

फिल्म मे अभिनेता विजय वर्मा और अभिनेत्री रानी चटर्जी का शायरी है जो हिंदी मे है, क्या भोजपुरी साहित्य इतना कमजोर हो गया है की भोजपुरी मे आप को शायरी नही मिली ? फिल्म के लेखक महोदय थोडा तो ध्यान दिए होते? विजय व रानी का एक्शन कमाल है, थोड़ी-२ गलतियों को नजरंदाज किया जाये तो फिल्म समाजिक मुद्दे को प्रस्तुत करती हुई अच्छी बन गई है अच्छा प्रयास किया है सभी ने।

समाजिक कुरूतियों पर प्रहार करती औसत मनोरंजक फिल्म है रानी नंबर 786
मधुप श्रीवास्तव

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