बाकिर : भोजपुरी कविता संग्रह

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बाकिर के लेखक की ओर से

आज के जिन्दगी के चाल बड़ा तेज हो गइल बा। एह तेज चाल में झटकत आ हाँफत आदमी आडंबर आ ढोंग के जवना जमाना में चल रहल बा, ऊ जिन्दगी के मूल्य बदल देले बा। ई बदलाव जिन्दगी के पुरनका ढ़ंग-ढर्रा में हर जगह प्रश्न चिन्ह बन के खड़ा हो जात बा, आ सोचावट के धागा में जगह जगह “बाकिर” के गाँठ अपने आप पड़ जाता। उहे “बाकिर” एह संग्रह के कविता में उतरले बा।

लेखक: शारदानन्द प्रसाद
बाकिर: भोजपुरी कविता संग्रह

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