डॉ. हरेश्वर राय जी के लिखल बेटी बिना जियल अपमान लागेला

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जइसे चंदा बिना सून आसमान लागेला
ओइसे बेटी बिना जीवन सुनसान लागेला ।

बेटी देबी, बेटी दुरगा, बेटी कालीमाई
मीरा, सीता, गीता बेटी, बेटी लछमीबाई,
जइसे गुड़ बिना फीका पकवान लागेला
ओइसे बेटी बिना आगन समसान लागेला ।

पूजा के थाली ह बेटी, बेटी तीरथ धाम
नदिया के पानी ह बेटी, बेटी ह बरदान,
जइसे आदित बिना बसिहा बिहान लागेला
ओइसे बेटी बिना दुनिया जहान लागेला ।

सावन बेटी, पावन बेटी, बेटी रितु बसंत
तितली, कोयल, मैना बेटी, आशा-खुशी अनंत,
जइसे गोरेया बिन, बधारी के सिवान लागेला
ओइसे बेटी बिन, मतारी के मकान लागेला ।

बिटिया के बिना इ दुनियां हो जइहें बिरान
इनकर देखि उपेक्षा लोगे, खिसिअइहें भगवान,
जइसे उपज बिना खेत खरिहान लागेला
ओइसे बेटी बिना जियल अपमान लागेला ।

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