इंडस्ट्री खराब नहीं होती, लोग अच्छे-बुरे होते हैं: निर्देशक कुमार विकल

0
278

सन्नाटा के साथ फिर से सुर्खियों में आए लेखक-निर्देशक कुमार विकल भोजपुरी सिने उद्योग की बेवजह हो रही आलोचना से आहत हैं। वह अपनी अलग राय रखते हैं। उनका कहना है, यह बहस का विषय नहीं है, बल्कि इस उद्योग को बेहतर बनाने की आवश्यकता है। हम बस दूसरे पर आरोप लगाने में
ही व्यस्त रहते हैं, अपने कर्तव्य पालन का हमें ध्यान ही नहीं आता। इस वरिष्ठ निर्देशक से इन सारी बातों के साथ उनकी नयी भोजपुरी फिल्म “सन्नाटा” को लेकर विस्तार में हुई वार्तालाप के अंशः

1. एक लम्बे अर्से के बाद पुनः सक्रिय हुए हैं, फिर से ‘सन्नाटा’ तोड़ने की पहल की है आपने?
हां, कुछ समय तो निकल ही गया। लेकिन, मैं जब तक स्वयं आश्वस्त नहीं होता, फिल्म के लिए हामी नहीं भरता, हां नहीं करता। ‘सन्नाटा’ तोड़ने जैसी तो बात नहीं है, भोजपुरी फिल्मोद्योग अपनी गति से चल रहा है।

2. सन्नाटा न सही, चहल-पहल तो कम हो ही गयी है। अब थोक भाव में फिल्मों का निर्माण नहीं हो रहा?
ये चिंता की बात नहीं, बेहतर निर्माण प्रक्रिया का सूचक है। हम जो निर्माण करें, वह दर्शनीय हो, सराहनीय हो, तभी हमारा प्रयास सार्थक होगा।

3. लेकिन, भोजपुरी फिल्म इंडस्ट्री तो अपनी गंदगी के लिए बदनाम है? इस पर क्या सफाई देंगे?

सफाई देने की आवश्यकता नहीं। कोई इंडस्ट्री खराब या अच्छी नहीं होती, उस क्षेत्र में कार्यरत लोग अच्छे-बुरे होते हैं, हो सकते हैं। बेटा नक्कारा निकल जाये तो उसके लिए उसके मां-बाप को गाली देना सही नहीं, मर्यादा की बात नहीं। अगर आपको लगता है कि आपकी फिल्म इंडस्ट्री सचमुच बदनामी झेल रही है, तो इसको बेहतर बनाने के प्रयास में जुट जाएं। अच्छी फिल्में बनाएं, ताकि ये लांछन मिट जाए।

4. आप जो बना रहे हैं ‘सन्नाटा’, क्या उससे भोजपुरी सिनेमा का रूप निखरेगा?
बिल्कुल निखरेगा। ‘सन्नाटा’ एक फिल्म नहीं, उन लोगों के हाथ का दर्पण होगी, जो अब तक सिर्फ वीभत्स और कुत्सित तस्वीरें देखते रहे हैं। ‘सन्नाटा’ में दिखेगा नया रंग, नयी सूरत। यह हर तरह से एक साफ-सुथरी और मनोरंजन की हर कसौटी पर खरी उतरनेवाली प्रेरक फिल्म होगी।

5. सुना है, इसमें नया-नया प्रयोग हो रहा है। मंच के कलाकार इन्ट्रोड्यूस हो रहे हैं?
हां, प्रयोग ही कह लीजिए। इसमें रंगमंच के कई मंजे हुए कलाकार पहली बार भोजपुरी फिल्म में दिखायी देंगे। यह रिस्क मैंने जानबू-हजयकर लिया है। अब तक भोजपुरी सिनेमा में मंच पर लोकगीत गानेवालों को ही मौका दिया जाता रहा है। लेकिन, हमारे कलाकार सिद्धहस्त कलाकार हैं। वह भोजपुरी फिल्म जगत के लिए एक नयी उपलब्धि साबित होंगे।

6. कौन-कौन हैं वह?

प्रीतमपुरा (दिल्ली) के सबसे बड़े रामलीला ग्रुप के श्रीराम अर्थात् लक्ष्य कुमार और रावण यानि करन सिंह “सन्नाटा” के नायक व खलनायक हैं। इनके साथ नेहाश्री, रीतेश राय, सचित कुमार, श्वेता वर्मा, नरेश कुमार, आरती श्रीवास्तव, मुकेश कुमार, शकीला मजीद, के.के. गोस्वामी और बृजेश त्रिपाठी।

7. ‘सन्नाटा’ का विषय क्या है?
‘सन्नाटा’ कथा-पटकथा के स्तर पर भी एक नयी फिल्म होगी। यह रुटीन भोजपुरी फिल्म नहीं होगी। इसमें सस्पेंस-थ्रिल खूब है। एक हाॅरर फिल्म है ‘सन्नाटा’, पर हमने भूत-प्रेत की पुरानी मान्यताओं को नकारा है, नये संदर्भ में हैं वे सारी बातें।

8. दर्शकों से कुछ कहना चाहेंगे?
यही कहूंगा कि सभी दर्शक अच्छी फिल्मों को देखें,ब-सजय़ावा दें। बुरी या अभद्र फिल्मों को नकारें ताकि स्वस्थ मनोरंजक फिल्मों के निर्माता-निर्देशकों को
प्रोत्साहन मिले। मेरी पिछली फिल्म ‘करेला कमाल धरती के लाल’, ‘रखिह लाज अंचरवा के’, ‘शिव गुरु महिमा’, ‘रंगबाज हीरो’ आदि को जो उनका प्यार मिला, वैसा ही प्यार ‘सन्नाटा’ को दें।

एह पोस्ट पऽ रउरा टिप्पणी के इंतजार बा।

Please enter your comment!
Please enter your name here

18 − 9 =