लौंडेबाज़ भोजपुरी गायक साया मे लगाते मीटर

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भोजपुरी भाषा, साहित्य और संस्कृति, मेरा मतलब, उसकी लोकसंस्कृति पर कुछ गैर जरूरी मठाधीशो का कब्ज़ा है। वो भोजपुरी के नाम पर विदेशी भोजन कर रहे हैं। कुछ भजन और अकादमियों उसका भक्षण । अभी आवश्कता है भोजपुरी संस्कृति को संस्कार संस्कृति के नाम पर जो मौज मस्ती की संस्कृति का खेल खेला जा रहा है उससे निकलने की. लेकिन बिल्ली की गले मे घंटी कौन बंधे ? भोजपुरी भाषा, साहित्य और संस्कृति को फिल्मों मे इतने अश्लील तरीके से पेश किया जाता है की देख के अश्लीलता भी शर्मा जाए! भोजपुरी गायक और लौंडेबाज़ कोई भी पर्व आते ही भक्ति एल्बम निकालना शुरू कर देते है. जिस माँ की इतनी पूजा ऑर अर्चना करते है (स्त्री को कितना सम्मान देते है) , वही रोड छाप ऑर लौंडेबाज़ भोजपुरी गायक बाद मे उन्ही माँ बहनों को आपने गाने के जरिये कपड़े तक उतार देते है. क्या ये गाना गाने के बाद या फिल्म बनाने के बाद अपने परिवार के साथ कभी देखते नहीं या सुनते है ? सेन्सर बोर्ड तो छोड़िए अगर आपने गाने घर परिवार से मेरा मतलब अपनी माँ बहन और बीबी से ही पास करवा दे या फिर एक सब साथ मे बैठ के देख ले तो अपने आप सब समझ मे जाये ? इन लौंडेबाज़ गायकों ने तो भोजपुरी समाज और भाषा को आर्केस्ट्रा और अश्लीलता की धूरी बना दिया है, भोजपुरी फिल्मे या गाने अश्लीलता के पर्याय बस बनके रह गए है।

भोजपुरी भाषा, साहित्य और संस्कृति को आगे ले जाने वाला ये फिर इस दलदल निकले वाला कोई नहीं, किसी को इसकी फिक्र नहीं. भोजपुरी के नाम पर कुकुरमुते की तरह संस्थान उग आई है, जो ले दही दे दही अवार्ड नंगा खेल कर रही है. लेकिन वो सब अपने फायदे के लिए. कोई इसे संवैधानिक पहचान दिलाना चाहता है कोई इसका ब्रांड आइकॉन बनाना चाहता है, पता नहीं इस भोजपुरी का क्या होगा मुझे तो लगता है की रोड छाप और लौंडेबाज़ भोजपुरी गायक लहंगा, चोली के अंदर घुस कर और खटिया पर सो कर साया मे मीटर लगा कर इसका बलात्कार करते रहेंगे।

लौंडेबाज़ भोजपुरी गायक साया मे लगाते मीटर

चन्दन कुमार सिंह (एडिटर जोगिरा डॉट कॉम)

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