शारदानन्द प्रसाद जी के लिखल भोजपुरी किताब खेल खेलाड़ी आ ओकर बोल

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भोजपुरी किताब खेल खेलाड़ी आ ओकर बोल के लेखक शारदानन्द प्रसाद के ओर से

भोजपुरी बिहार आ उत्तर प्रदेश के सम्मिलित ऊ क्षेत्र ह, जहवां भोजपुरी प्रधान रूप से बोलल जाला। एह क्षेत्र में छपरा, सीवान, गोपालगंज, आरा, चम्पारण, बलिया, बनारस, गाजीपुर आ जौनपुर जिलन के सामिल कइल जा सकेला। एह क्षेत्र के बाल मण्डली में अनेक अइसन खेल परचलित बा जे मनोरंजन के साथ-साथ भासा के एक सूत से सबके बान्हे ला।

एह बाल खेलन के अनेक दृष्टि से महत्व बा। ई खेल आउर एकर बोल लइकन के जिनगी पर सुनर आ मनोवैज्ञानिक प्रभाव डालेला। एह से लरिकन के मानसिक आ शारीरिक विकास त होखबे करेला भासा बोले में भी ई खेल तोतली बोली के लइकन के सहजोग करेला। तोतली बोली में संसार के कवनो भासा मीठ बन जाले। भोजपुरी के ई खेल आ वोकर बोल मनोरंजन परम्परा, बतकही, सभ्यता, जिनगी बतावे के ढंग से समेटले माला के फूल जइसन आपन अस्तित्व लेके भी समूह रूप में एगो बेजोड़ सुन्दरता के सृष्टि करेला।

ई खेल लइकाई से लेके किशोरावस्था तक खेलल जाला। एह खेलन में लइका लइकी दुनो, भाग लेला। बहुत खेलन में त माई-बाप भी साथ देला। लाइका लोग खेल बाड़ा पसन्न करेला। डेहुरी से बाहर होते-होते एह लोग के बाग ना आड़ाला। खेल के साथे-साथे ई लोग खेल के बोल भी बोलेला। जवना से खेल में चार चान आग जाला आ देखनिहार के धरनिहार लागेला। सुरु-सुरु में लाइक लोग खेले के हालत में ना रहेला। तेपर ई लोग आपन हाथ गोड़ पटक पटक के एकर कमी पूरा कर लेला। ए अवस्था में मतारी एह लोग के खेल के ओर आकर्षित करेला। ई अवस्था छव महीना से लेके साल भर रहेला। सालभर के हो गइला पर ई लोग अपने से भी खेले के कोसिस करेला। एह भोजपुरी किताब खेल खेलाड़ी आ ओकर बोल में ओही खेल के बरनन होई जेके छव महीना से लेके चउदह बरिस के लइका, लइकी खेलेलन।

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