नाट्योत्सव में मंचित होई भोजपुरी नाटक ठाकुर के कुइयां

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मैथिली-भोजपुरी अकादमी, दिल्ली के एगो अइसन संस्था बा जवन मैथिली आ भोजपुरी भाषा के उत्थान में काफी सक्रीय रूप से सकारात्मक डेग बढ़ा रहल बा। संस्था समय-समय पर अलग-अलग तरह के कार्यक्रम करावत रहेला जवना से भोजपुरी-मैथिली साहित्य, गीत-संगीत, नाटक आदी के क्षेत्र में काम करे वाला लोग के मनोबल त बढ़बे करेला एकरा साथ-साथ भाषा के बलो मिलेला। एही क्रम में अकादमी 21 फरवरी से 23 फरवरी तक नाट्योत्सव करा रहल बिया जवना में 21 फरवरी के मुंशी प्रेमचंद के सुप्रसिद्ध कहानी ठाकुर का कुआं पर आधारित भोजपुरी नाटक ठाकुर के कुइयां के मंचन हो रहल बा। एह नाटक के परिकल्पना, अनुवाद आ निर्देशन लव कान्त सिंह के बा। 22 फरवरी के मैथिली नाटक आब मानि जाउ के मंचन आ 23 के गजल गायन हो रहल बा।

दिल्ली में नाटक त बहुते होला बाकी भोजपुरी नाटक के बात कईल जाओ त एकही गो सक्रीय संस्था बा रंगश्री। रंगश्री ही समय-समय पर भोजपुरी नाटक आ भोजपुरी नाट्योत्सव के माध्यम से भोजपुरिया संस्कृति आ संस्कार से लोग के अवगत करावत रहेला काहेकी रंगश्री के दर्शकन में लगभग 30ः दर्शक गैर भोजपुरी भाषी बा लोग। भोजपुरिया लोग के भी मेट्रो शहर में भोजपुरी आ गाँव के माटी से जुड़ल कथा आ कथानक देखे के मिलेला त मन गदगद हो जाला। एही अभियान के आगे बढ़ावत रंगश्री 21 फरवरी के दिल्ली के मंडी हासउ स्थित एलटीजी सभागार में भोजपुरी नाटक ठाकुर के कुइयां के मंचन होखे जा रहल बा। उपन्यास सम्राट मुंशी प्रेमचंद जी के मूल हिंदी कहानी पर आधारित ई नाटक के पहिला मंचन के भी बहुत सराहना मिलल रहे।

नाटक में जातिवाद, छुआछूत आ अमीरी-गरीबी पर जोरदार प्रहार त भइले बा साथे-साथ एक ओर जहाँ मानवीय मुल्य में हो रहल गिरावट त दोसरा ओरी पानी जईसन ज्वलंत मुद्दा पर भी सभे के सोंचे पर मजबूर करत बा। एह कहानी के भले ही प्रेमचंद जी अपना समय के समस्या पर लिखले बानी बाकी ई समस्या आजो समाज में बा आ पानी जईसन समस्या त विकराल रूप धरत जात बा। दिल्ली जइसन शहर में लगातार भोजपुरी नाटक क के एगो मजबूत संदेश भी देहल जाला ऐहिसे ठाकुर के कुइयां के मंचन दुसरा हाली हो रहल बा, ऐकरा से पहिले इहे नाटक 27 सितम्बर 2016 के दिल्ली में ही भइल रहे। अइसन आयोजन सफल तबे हो सकेला जब भोजपुरी भाषा से प्रेम रखेवाला लोग सपरिवार पहुंचो आ अपना माटी से जुड़ल कलाकारन के हियाव बढ़ावे।

एह पोस्ट पऽ रउरा टिप्पणी के इंतजार बा।

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