भोजपुरी ई पत्रिका आखर मई जून २०१७

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गावँ के नाम सुनते आँखि में चमक आ करेजा में बहार आ जाला । बचपन के सदन, संघतियन के साथे खेला, बगइचा के जमघट, मास्टर साहेब के छड़ी आ बछरू अइसन ताजगी से भरल मन अनसोहातो याद आवे लागेला । समाजशास्त्री लो कहले बा सक आदमी के पहिला पाठशाला पररवार हs आ दसूरका समाज । समाज में पड़ोस, संघतियन के समहू आ पूरा परिवेश आ जाला। समाजे अनशुासन सिखावेला, भाईचारा आ मले-जोल के पाठ पढ़ावेला आ समाजिक मूल्य आ नैतिकता के आचरण सिखावेला। आज गााँव दरक रहल बा। गााँव के साथे – साथे दरक रहल बा समाज । अनशुासन, भाईचारा, मेल-जोल, समाजिक मूल्य आ नैतिकता जइसन शब्द नाच के लाबार खानी हाँसी के पात्र बन गइल बाड़े सन । अइसन समय में आजओु कुछ लोग बा जे गााँव के सांस्कृतिक धरोहर अपना बीचे जियतार रखले बा । शरीर से उ जहें होखे, मन से गााँवे में रहेला । नवका पीढ़ी के बेचैनी आ महत्वाकांक्षा के अइसने लोग माँजले बा आ गााँव के मएु से रोकले बा।

भोजपुरिया समाज के बनावट में गााँव केंद्रीय तत्व बा। इहो कहल जा सकेला कि भोजपुरी आ गााँव एक दसूरा के पर्याय हs । अगर कुछ अपवाद के छोड़ दिहल जाव त गााँव छोड़ते लोग भोजपुरी छोड़ देला। सचूना क्रांति से मले मिलाप बढ़ल बा । उपभोक्तावादी संस्कृति लोग में भोग के प्रवृति बढ़ा रहल बा। गााँवहु में रहे वाला संतोष के परम सुख माने खातिर तइयार नइखे । अभाव खटक रहल बा । अपना अभाव खातिर उ अपना गाँवई जिनगी के दोष दे रहल बा । एहि से मौका मिलते गााँव से जड़ुल हर खाल के उतार के फेंक देबे के चाहता। शहर ओकरा के स्वीकार नइखे करत आ गााँव से उ नजर चोरावता।

भोजपुरिया गााँव-समाज एहि विरोधाभास में जी रहल बा। देश के दोसरा भाग में गाँवई जिनगी से ई अलगाव देखे के ना मिले। हरियाणाआ पंजाब जइसन राज्य के गााँव में रहेवाला लोग के मन में कवनो अभावबोध नइखे। लोग सुखी सम्पन्न बा । बाजार के दबाव सहे खातिर सभे समर्थ बा। अपना संस्कृति आ पहचान पर लोग में गौरव के भाव बा । कल्पना आ यथार्थ में कवनो विरोधाभास नइखे । एहि से गााँव आबाद बा । गााँव के भाषा आबाद बा । गााँव के संस्कृति के विस्तार हो रहल बा।

आखर के ई अकं गााँव के विविध पक्षन के अपना में समेटले बा । रउआ कतहुँ बानी ई अकं पढ़ के अपना हृदय में आपन गााँव महससू करब। गााँव
के पीपर के छााँह में बइठ के जिनगी बनावे के किसिम -किसिम के योजना एक बेर आउर आकार ली। गाँवई जिनगी के बिखरल फूल एगो लड़ी में गाँथूा के रउआ सोझा प्रस्तुत होई । आखर के हर अकं खानी एहु अकं के राउर स्नेह आ आशीर्वाद मिली एही कामना आ विश्वाश के साथे –

आखर

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