सरिता साज़ आज के समय मे जानी मानी भोजपुरी लोक गायिका है। भोजपुरी लोक गायिका सरिता साज़ भिखारी ठाकुर रंगमंडल से जुड़ी हुई हैं। सरिता साज़ ने देश-के कई शहरों में जैसे- त्रिपुरा, गुवाहाटी, नागपुर, इलाहाबाद, मोतिहारी, छपरा (बिहार), अमरावती, वर्धा (महाराष्ट्र), दिल्ली इत्यादि के अलवा विदेशों में जैसे- पाकिस्तान के कराची, लाहौर, इस्लामाबाद, भूटान में भी अपने गायन का जलवा बिखेरा है।

लोकगीत के अलावा इनहोने शास्त्रीय संगीत, सुगम संगीत के साथ साथ गजल की भी प्रस्तुतियाँ दी हैं। अभी सरिता साज़ इंडियन कल्चर सेंटर ऑफ श्रीलंका के बुलावे पर 21 जून को “वर्ल्ड म्यूजिक डे” पर आयोजित प्रोग्राम मे लोक गीत का परचम फहराने श्रीलंका जा रही हैं। इस कार्यक्रम में सरिता पूर्वी, निर्गुण, कजरी, दादरा के अलावा अनेक गीतों को गायेंगी। इंडियन कल्चर सेंटर ऑफ श्रीलंका के अलावा कोलंबो विश्वविद्यालय एवं कैंडी शहर में भी अपनी प्रस्तुतियाँ देंगी।

लोकगीत में महत्वपूर्ण योगदान के लिए भोजपुरी लोक गायिका सरिता साज़ को जन मीडिया एवं डिफ़ेंडर ऑफ फ्रीडम (दिल्ली) की तरफ से वर्ष 2016 में कला गौरव सम्मान से सम्मानित किया जा चुका है।

भोजपुरी लोक गायिका सरिता साज़ के बारे में कुछ महत्वपूर्ण तथ्य

प्राथमिक सकूल के समय से ही मेरा लगाव गीत-संगीत से रहा है। स्कूल के समय से ही बेतिया घराने (पश्चिमी चंपारण) के माया मिश्रा से शास्त्रीय गायन का विधिवत प्रशिक्षण लेना शुरू किया था। उसके बाद मैंने प्रयाग संगीत समिति (इलाहाबाद) से संगीत प्रभाकर की उपाधि प्राप्त किया। संगीत के इस यात्रा में तीन वर्ष का एक अंतराल है जिसमें मुझे बी.टेक. कर नौकरी करनी पड़ी। अंततः मैंने इंजीनियर की नौकरी छोड़ लोकगीत गायन शुरू किया।

इसी बीच लगभग 100 वर्ष पुराने भिखारी ठाकुर रंगमंडल से जुड़ कर भिखारी ठाकुर के साथ काम कर चुके कलाकारों से भिखारी ठाकुर के गीतों को उन्ही की शैली और अंदाज़ में सीखा एवं अब देश-विदेश के विभिन्न कार्यक्रमों में गायन कर रही हूँ। फिलहाल भिखारी ठाकुर रंगमंडल की स्थायी सदस्य हूँ तथा दिल्ली में रहते हुए उनकी विरासत को गायकी द्वारा आगे बढ़ाने का कार्य कर रही हूँ। सांप्रदायिक सदभावना के एक अहम परियोजना के तहत मैं कबीर प्रोजेक्ट पर काम कर रही हूँ जिसमें उनके दोहे एवं गीतों को संगीतबद्ध कर गायन करती हूँ। गायन के अलावा मैं रंगमंच (Theater) से भी जुड़ी रही हूँ।

बहुत कम ही समय में मैंने कुछ राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर के कार्यक्रमों में भागीदारी कर अपना परफॉर्मेंस दिया है जिसमें कुछ मुख्य कार्यक्रमों का ब्योरा निम्नलिखित है।

  1. कराची एवं लाहौर (पाकिस्तान-2015) में सांप्रदायिक सदभावना विषयक विभिन्न कार्यक्रमों में कबीर, फ़ैज़ अहमद फ़ैज़, अदम गोंडवी एवं भिखारी ठाकुर के विभिन्न गीत-गज़लों का गायन।
  2. संगीत नाटक अकादमी (दिल्ली) के विभिन्न कार्यक्रम जैसे: देशज (आजमगढ़-2016) एवं नाट्य समागम (त्रिपुरा-2015, गुवाहाटी-2015, दिल्ली-2016) में गायन।
  3. कुम्भ मेला-2015 इलाहाबाद के सांझी विरासत के सांस्कृतिक कार्यक्रम “सिरजन” में लोकगीत गायन।
  4. दिक्षाभूमि (नागपुर-2014) में कबीर गायन।
  5. जवाहर लाल नेहरू यूनिवर्सिटी रंग महोत्सव (2015-16), दिल्ली विश्वविद्यालय (2015-16), महात्मा गाँधी अंतरराष्ट्रीय हिन्दी विश्वविद्यालय (2014-15) के विभिन्न कार्यक्रमों में लोकगीत गायन।
  6. भोजपुरी जन जागरण अभियान (दिल्ली-2015 एवं 2016) के कार्यक्रम में पूर्वी, निर्गुण, कजरी जैसे विभिन्न भोजपुरी लोकगीतों का गायन।
  7. IPTA अमरावती (महाराष्ट्र) द्वारा आयोजित कार्यक्रम में भोजपुरी लोकगीत गायन (16 नवंबर 2016)।
  8. Press Club of India में Institute for Social Democracy द्वारा आयोजित कार्यक्रम में कजरी, निर्गुण, पूर्वी, नौटंकी गज़ल, बिदेसिया गीत का गायन ( 26 नवंबर 2016)।

लोकगीत में महत्वपूर्ण योगदान के लिए मुझे जन मीडिया एवं डिफ़ेंडर ऑफ फ्रीडम (दिल्ली) की तरफ से वर्ष 2016 में कला गौरव सम्मान से सम्मानित किया गया है।

एह पोस्ट पऽ रउरा टिप्पणी के इंतजार बा।

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