कन्हैया प्रसाद रसिक जी के लिखल भोजपुरी गीत जिनिगी

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जिनिगी जंग ना ह जे जीतल जाव
जिनिगी पतंग ना ह जे खिंचल जाव
जिनिगी त दरिया के बहत पानी ह
एह से सुनर समाज के सिंचल जाव

सुख दुख के ऊँचा खाला से ना रूकेला
आफत के ताप से जिनिगी ना सूखेला
रसिक पो भरोसा रखऽ गलत ना बतइहें
जिनिगी तऽ बाँस ह नववला पो ना टूटेला

आपन अनकर के भेद मिटाव
सभ केहु के अपने सवांग बताव
ढ़ेला फेंकेवाला के हाँथ दुखा जाई
सभ लो के अपना करेजा में सटाव

अनघा बिटोरला के का जरूरत बा
आँख तरेरला के का जरूरत बा
सभ काम मीठ बोलले से होता त
जहर घोरला के का जरूरत बा

फूल खिलने दे अड़ंगा मत डाल
ऐ जिन्दगी ! तू अपनी आदत बदल ले

एह पोस्ट पऽ रउरा टिप्पणी के इंतजार बा।

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