डॉ गोरख प्रसाद मस्ताना के भोजपुरी गीत ‘तीत मीठ’

केहू से हम तीत मीठ बतियाई काहे
बिना कान से सुनले पतियाई काहे

झूठ साँच के खेल हवे आगी जइसन
बेमतलब के आपन हाथ जराई काहे

के, बा जे नीमन चाहेला दोसरा के
अनका कहले केहू से अझुराई काहे

मदद करे के बेरिया कुछुउ सोचनी ना
लउटा दिही, बा सबुर , छतियाई काहे

लउकत बा की बईमानी के धन बा आगू
रसबे न जब करी त उ हथियाई काहे

जे हमरा निमना बउरा में साथे बा
हम उनकर एहसन भला बीसराई काहे

बात ठीक, ना सकली दू दिल जोरे में
बूता न पवनी त, झगरा सुनगाई काहे

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