विवेक सिंह जी के लिखल तीन जो भोजपुरी गीत

विवेक सिंह जी
विवेक सिंह जी

बिरह के आग

आस धरा के गईलअ सजना, अईलअ ना कबो पास मे!
केतना सावन बित गईल, साजन तहरा याद मे!

रोए चूरी कंगना, सुख गईल केशिया के गजरा!
मन चुपके से बईठल बा,साजन तू अईबअ अंग ना!

लेअई ब हमरा के गजरा, केस मे लगईब अपना हाथ से!
हरिहर चूरी सावन मे, पेनई ब अपना पास से!

आस धरा के गईलअ सजना,अईलअ ना कबो पास मे!
कब तक बैठी हो के उदास,ना भेजलअ कोनो चीठी-तार!

अरे बहुत डर लागेला हमरा, कही बस गईलअ का सवत के साथ मे!
बस सेनुरा के लाज बचई ह, तू हमरा के ना भूलई ह!

हम इहे सोच मे बानी, केहु से कुछ ना कहतानि!
तू हवअ हमार साजन, एही से दुख सहत बानी!

आस धरा के गईलअ सजना, अईलअ ना कबो पास मे!
केतना बसंत बित गईल, कोयल अब ना कुहके!

साजन तहरा याद मे, अखिया के कजरा सुखे!
गिरल पता डाल से, सुख गईल हरियाली!

कब अईबअ सजना, ओठवा मागे लाली !
बुन्द से प्यास ना बुझेला, मन के रस अब सुखेला!

आस धरा के गईल सजना, अईलअ ना कबो पास मे!
जब तरसावे के रहे, गवना काहे करईल !

हमरा मनवा मे प्रेम के, फुल काहे खिलईल!
कईसन होला वृिह के आग, अब हमरा बुझाता!

साजन तहरा बगैर, अब जिअल ना जात!
जल्दी आजा सजना, सास अब रुकल जाता!

अब रहा के देखे मे, साजन अाख भी धोखा खाता!
आस धरा के गईलअ सजना, अईलअ ना कबो पास मे!

बन जाई तहार

गित बनी या शायरी बनी,
या बनी आज गजल तहार!

तू झिल के कमल बारू,
मन कहे बन जाई पंखुरतहार!

ओड़नी बनी या आचल बनी,
या बनी आज काजल तहार!

तू ऊपवन के सुन्द्रता बारू,
मन कहे बन जाई साथी तहार!

लाली बनी या कुमकुम बनी,
या बनी आज बिन्दिया तहार!

तू रूप के सागर बारू,
मन कहे बन जाई हंश तहार!

कंगन बनी या चूरी बनी,
या बनी आज गजरा तहार!

तू मोम के गुरीया बारू,
मन कहे बन जाई जान तहार!

झुमका बनी या बाली बनी,
या बनी आज नथिया तहार!

तू बिना घूघरू के पैजेब बारू ,
मन कहे बन जाई घूघरू तहार!

चुनरी बनी या सारी बनी ,
या बनी आज सिन्दुर तहार!

तू चन्दन के सुन्दर गाछ बारू ,
मन कहे बन जाई खुशबू तहार!

याद

अाख रोए दिल तड़पे ला,
जब दिल केहु से बिछड़े ला!

“केहु-केहु के खास होला”
जब केहु से प्रित होला!

“मन-मित बिना अधुरा बा”
हार-जित बिना अधुरा बा!

“कबो-कबो लागे”
रूत-रित बिना अधुरा बा!

“कइसे केहु खास हो जाला ”
कइसे दिल के पास हो जाला!

“ई अखिया रंग-रूप ना देखे ”
बस प्रित के डोर से बन्ध जाला!

“अाख रोए दिल तड़पे ला”
जब दिल केहु ‘ से बिछड़े ला!

“मन भटके ला यार बिना”
दिल तड़पे ला प्यार बिना!

“जब ई रूत आवे ला प्यार के”
तब दिल गित गावेला यार के!

“अकेले ना जिअल जाई”
ई जुदाई ना सहल जाई!

“मन पागल नियन हो जाला”
बितल याद मे खो जाला!

“हर कोई समझे ई बेकार बा”
दुनिया से ऐकरा ना कोनो कार बा!

“अाख रोए दिल तड़पे ला ”
जब दिल केहु ‘ से बिछड़े ला!

“अब अंजान बन के जीअल जाता”
हर गम के पीअल जाता!

“ई दर्द लोगवा का जानी ”
कहलो पर केहु ना मानी!

“रूत प्यार के अब ना आई”
दिल मे उ फुल खिल ना पाई!

“चाहत अधुरा रह गईल”
सपना बन के खो गईल!

“दिल के कोना मे ”
उ याद चित्र बन के रह गईल!

अाख रोए दिल तड़पे ला,
जब दिल केहु ‘ से बिछड़े ला!

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