भोजपुरी कविता – गरमी

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गरमी बेसरमी ह
निदरदी ह
सुखा देला / ताल तलैया के पानी
हरियाली के निसानी
फुलवान के जवानी
बादल के कहानी / चोरा ले ला / कहीं ना
लउके ला तरान / फक फक परान / बून बून
पानी ला लोग हरान / परसान
गरमी पईसा के कठोर ह / टांगी नियर
गुमानी से उपजल गरमी / बड़ा कटीला ह
शुरू में ना बुझाला / ना पिराला
पोठइला पर दोसरा के संगे
अपने के जरा लेला
अपने के हरा लेला
बाकिर बुझाला ना / काहे कि
गरमी के चश्मा से कुछुउ / सुझाला ना
गरमी जवानियों में ह
उफ़नाला दूध नियर त
हलचल मचा देला
भाई बाबु के मरजी बिना
घरवा बसा लेला / नतीजा
जिनिगी नरक हो जाला
ना एनही के होला / न ओनही के
जईसे धोबी के कुत्ता ….

रचनाकार: संतोष कुमार, संपादक : भोजपुरी जिंदगी

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