भोजपुरी कविता ससुरारी के दाना खइले

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ससुरारी के दाना खइले
एक जमाना बीत गयल
जब से साली गईल बियह के
आना-जाना छुट गयल।

मनवा होखे देख के चोहर
साली जब भईल लड़कोहर
बईठ टवेरा घुमब केह संग
सब गीत गवनई भूल गयल।

जीजा सुनले ढेर दिन बीतल
अइसन काहें जेर भयल
साली से सढुआँईंन वाला
रिश्तेदारी मोड़ गयल।

बिन साली ससुरार कांट हव
जहर सारी प्रीत भयल
अब धुर ऊड़त सावन में लागै
जईसे बदरी रूठ गयल।

दिया देवारी के दियना में
बिन तेल के बाती जर गयल
दुअरे बिन सजले रंगोली
तिऊहार बेचारा बीत गयल।

केकरा संगे फाग मनाईं
रंग घोरल सब सुख गयल
केकरा से अब करीं नोहोरा
पहुनाई जब तीत भयल।।”योगी”

कवि परिचय- योगेंद्र शर्मा “योगी”
ग्राम व पोस्ट- भिषमपुर
तहसील- चकिया, जिला- चंदौली , UP.
शैक्षणिक योग्यता- राजनीति शास्त्र से पोस्ट ग्रेजुएट
अध्ययनरत- सिविल सेवा की परीक्षा में

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