विमल कुमार जी के लिखल भोजपुरी लघु कथा एक लोटा पानी

विमल कुमार जी
विमल कुमार जी

रामदीन थाकल मांदल आँफिस से अपना घरे आवते बड़ी जोर-जोर से आवाज लगइले। बेटा सुनत बाड़$ बड़ी जोर से पिआस लागल बा जलदी से एक लोटा पानी ले आव$ ना त$ लागता की परान निकल जाई।

बाकी पुरन अपना धुन में मस्त रहन बात सुनि के भी अनसुना क दिहले।

रामदीन फेरु बोलले बेटा पुरन एको डेग चले के मन नइखे करत बाड़ त जलदी से एक लोटा पानी पिआव$।
—बाकी रामदीन के कवनों जबाब ना मिलल त उ कसहुँ

कसहुँ कल तक जाके लोटा में पानी भरले अउरी जसहीं दु घोंट पिअले।पानी धड़ाक दे करेज ध लेलस। रामदीन के आँखि के आगे अन्हार हो गइल।

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—— लोटाहाथ से छुटि के एक ओर टन-टन क के ढिमिला गइल अउरी रामदीन ओहिजे गिर के अचेत परि गइले।

अतना आवाज़ होखला के बादो पुरन देखे ना गइले की ई आवाज अतना जोर-जोर से कहवाँ से आईल।

पूरन मोबाइल प फेसबुक अउरी वाट्सएप अतना गड़ि गइल रहन की ओने देखल जरूरी ना समझले। ओने रामदीन जी कल प बेसुध परल रहन बाकी केहु देखवैया ना रहे।

लोटा
लोटा

पुरन के माई जब मंदिर से अइली त पुछे लगली की बबुआ बाबुजी तहार आँफिस अइले की ना जब पुरन ना
बोलले त उनुका भिरी जा के कहे लगली लागता एक दिन तहार मोबाइल फोरि के फेंके के परी तु कवनों बात प धेआन नइख$ देत।

हम तहरा से का पुछनीं ह–बाबुजी के नु आ गइल बाड़े अपना कोठरी में आराम करत होईंहें।

सुनतानी जी काहाँ बानीं——कवनों जबाब ना मिलल त जलदी जलदी कोठरी में गइली ना रहन त कल ओरे जसहीं गइली रामदीन के बेसुध गिरल देख के दहाड़ मारि मारि रोवे लगली।
———-पुरन जब रोवल सुनलन त दउर के ओने से अइले त बाबुजी के बेहोश गिरल देखि के उनुकर होश उड़ि गइल।

–पुरन अपना के कसहुँ संभरले अउर बाबुजी के टांगि के भिरीये एगो खाटी रहे ओही प सुता के पानी के छींटा मरले त लागल की बाबुजी जीयत बाड़े।

माई तु बाबुजी के देखत रह$हम जलदी डागडर साहब के लिआ आवतानीं। डागडर साहब एगो सुई अउर कुछ दवाई देके कहले की घबराये के कवनों बात नइखे रामदीन जी एक दु दिन में ठीक हो जइहें।

डागडर साहेब के ई बात सुनि के पुरन के जीव में जीव परल । पुरन मनहीं मन किरिया खइले की अब से अइसन गलती कबो ना करम।

पुरन बाबुजी के सेवा में दिन रात एक क देले। रामदीन जी बड़ी जलदी ठीक होके आँफिस भी जाये लगले।

बाक़ी रामदीन ई बात अपना औरत से ना कहले की ई घटना एक लोटा पानी खातिर घटल बा।

रामदीन जी के आँफिस से घर पहुँचे के पहिलहीं पुरन गुड़ अउर एक लोटा पानी ले के दुआरी प खाड़ रहत रहन।

पुरन के बदलल बेवहार से उनुकर माई बाबुजी बड़ी खुश रहे लगले लोग अउर माई बाबुजी के सेवा क के पुरन के भी बड़ी खुशी मिलत रहे।

विमल कुमार
ग्राम +पोस्ट-जमुआँव
थाना-पीरो, भोजपुर, बिहार

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