भोजपुरी अपनी माटी मे ही बेगानी हो गई

सन 1992 से वीर कुंवर सिंह विश्वविद्यालय में चल रहा शाहाबाद क्षेत्र के एकलौता भोजपुरी अध्ययन केंद्र अब पूरी तरह से बंद हो जायेगा|

यह सिर्फ एक भाषा या एक विषय का पढ़ाई बंद हो जाना भर नहीं हैं, इसकी गंभीरता इस रूप में हैं की जहाँ भोजपुरी की पढ़ाई बंद हुई है वह देश विदेश मे भोजपुरी का प्रतीक माना जाता है और ये ऐसे वक्त पे बंद हुआ जब भोजपुरी को संविधान के आठवी अनुसूची में शामिल करने की मांग जोर पकड़ रही थी

सोशल मिडिया पर बहुत सारे ग्रुप और लोग भोजपुरी को संविधान के आठवी अनुसूची में शामिल करने की मांग को उठाते रहते है, और काफी सिद्दत और मेहनत से लगे हुए है, वक्त वक्त पे वे सोशल कम्पैन और भोजपुरी के बारे में लोगो की अवेर्नेस तथा भोजपुरी मे लोगो को पढ़ने लिखें के लिए प्रेरीत करते रहते है।

भोजपुरी लगभग 20 करोड़ लोगो की मातृ भाषा है और भारत के अलावा कई और देशो मे भी बोला जाता है।

इतना कुछ हो जाने के बाद ताजुब की बात ये हैं कि भोजपुरी फ़िल्म इंडस्ट्री का कोई भी हीरो, हीरोइन या सो कॉल्ड सेलिब्रिटी सामने नहीं आया और नहीं किसी भी सोशल प्लेटफार्म पे सपोर्ट में दिखा। मैं तो कहता हूँ कि इन्हे शर्म आनी चाहिये, जिस थाली मे खाते हैं उसी मैं छेद कर रहे हैं।

भोजपुरी फ़िल्म इंडस्ट्री जो की भोजपुरी भाषा और भोजपुरी लोगो के बदौलत चलता है उन्हें तो सामने आना चाहिये ये फिर इन्होंने सिर्फ भोजपुरी को बदनाम और फूहड़पन फ़ैलाने का जरिया बना रखा है।

भोजपुरी को तो भोजपुरी के लोगो ने ही बेगाना कर दिया है और ये अपनी माटी मे ही बेगानी हो गई।

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