जगदीश खेतान जी के लिखल भोजपुरी कविता कबले होब फेल

जगदीश खेतान जी
जगदीश खेतान जी

बबुआ तू कबले होब फेल?
का कहीं बहुत तोहका झेललीं,
अब हम ना पाईब तोहें झेल।

कइसे पढबऽ कबले पढब्ऽ।
का-का पढबऽ ई समझा दऽ
डागडर बनब कि इंजीनियर
तनी हमहूँ के इ बतला द ।

सुनतालऽ नाहीं का बबुआ
का काने मे बा परल तेल?
बबुआ तू कबले होब फेल?
रटते-रटते एतना रटल।

मैट्रिक में पांच साल कटल।
का एतना कठिन पढाई बा?
इन्टर मे सात साल खटल?
कब बी ए से पीछा ठूटी
एम ए के कटबऽ कब नकेल?
बबुआ तू कबले होब फेल॥

बैलबाटम कब्बो तोहें चाहीं
आ कब्बो जींस के फरमाइस।
पऽर छतीस के मोहरी रखल
आ घट के असो भईल बाइस।
हम सोच सोच घबरातानी
ई फैसन बा कि बा झमेल ?
बबुआ तू कबले होब फेल॥

बा ऐतना नशा सिनेमा के
तू फिलिम न कवनो छोडेलऽ।
आपन औकात न देखेलऽ
रानी से नाता जोडेलऽ।
गावेलऽ तू फिल्मी गाना
आ लगावेलऽ इतर-फुलेल।
बबुआ तू कबले होब फेल।।

एक दिन झीरी से हम तकलीं
त तू सिगरेट दागत रह लऽ।
कौनो हिरोइन के फोटो ले
अॅकवारी मे दाबत रहलऽ।
ई देख के हम भकुआ गइलीं
तू खेलत बाड खूब खेल ।
बबुआ तू कबले होब फेल ॥

कुछ खेतवो बान्हे रखाय गइल।
दुइ बीघा असो बिकाय गइल।
ॅखी मे पायरीला लागल
आ धनवो भी पियराय गइल।
डेहरी के अन्न बचल बा बस
बिक गइल गोडहरा और हुमेल ॥
बबुआ तू कबले होब फेल ॥

वर देखुआ जाने कब अइहें
कब हरदी लगी बियाह होई।
कब पूत जनमिहें ए घर मे
न जाने कब झांकर होई ।।
पोता पोतिन के अगोरा मे
हो जाय न खतम हमार खेल ॥
बबुआ तू कबले होब फेल ॥

कब्बो एतना रीस लागेला
ब्लडप्रेशर उपर भागेला।
हमके तोहार सगरो लच्छन
बरबादी वाला लागेला।
मन करेला कुवां मे एक दिन
सरउ तोहका देतीं ढकेल ॥
बबुआ तू कबले होब फेल ॥

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