भोजपुरी लघु कथा : ससुरारी – चन्दन कुमार सिंह

chandan kumar singh
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नया पायेट-सर्ट, सेंट गमकउआ, काँधे पर गमछा बाबाधाम आला, गोर में चमड़उआ जूता अउर मुँह में पान चबात, पिच-पिच थूकत जब झुना भाईवा घर से निकलन आ आपन देहेजुवा ललकी हीरोहुंडा पऽ बईठ के जईसे किक मरलस कि टुन्वा टोकलस “जा झार केऽ…हो”

टुन्वा के सुन के घप से गाड़ी रोक के पाहिले पिच से पिक थुकले आ बोलले “का रेऽ…कउनो काम नइखे, बड़ा बोल फेकत बाड़ेऽ…” एह पर टुन्वा कहलस “बोल नइखी फेकत…माने कहऽतानी, आजु खूब झरले बाड़S…लागत बा की ससुरारी के चढ़ाई बा”

“भाक बुरबक, मोड़ पऽ ले जा तानी, कुछ काम बा। “इहे कहत अउरी पान थुकत झुना भाई के गाड़ी आगे बढ़ि गइल।

जब झुना भाई के मोटरसाईकिल आँखि की ओझल हो गइने त टुन्वा दतुवन चवात उनकी दुआरे की ओर बढ़ल। दुआरे जहुप के, कल प कूला कईलस आ झुना भाई के घर के भीतरी घुसल, घुसते असोरा में झुना भाई के माई भेंटा गइली
“चाची परनाम, स्कूले…?” टुन्वा बोलल्स,
“खूस रहऽ ये पुता, तनी हमरा के स्कूली पऽ छोड़ दऽ” देवी जी (झुना के माई) बोलल्ली

हमार मोटरसाइकिल त रूनवा ले गइल बा, ना तऽ हम छोड़ देतीं” टुन्वा बोलल्स, “असली लाब्जा हवे तें” इ बोलत आ आँचर ठीक करत देवी जी चल दीहली।

काहो चाचा बोरा ले के कहाँ जात बाडऽ“ अँगना से बोरा लेके निकलत शामी चाचा (झुना के बाबूजी) से टुन्वा पुछ्ल्स

“का कहीं… गेंहू निकाले के बा बखार से, पिसान ओरा गइल बा, दू बेरा से पइचा ले के काम चलता” शामी चाचा बोलले

“इ ना कि झुना भाई के बोल देला, अबे नु मोड़ पऽ गइले हऽ, रास्ता मे दे देते गेहुवा पिसे के खातिर” टुन्वा कहलस

“हमरा समना नाव मत ले ओकर। आजु-कल की लइकन के ससुरारिए घर बा। महीना में 25 दिन ससुरारी में रहतऽ बाड़ऽ सन, घरे रहले पर एक्कोगो काम नइखे करे केऽ, दिनभर चउराहा अउरी बाजारी में घूमें के बा। बाप-माई घरे काम में परेसान बा पर ओने धेयान नइखे। ससुरारी में रहल जाता अउर ओही के आपन घर मानल जाता। अब बतावS, जब एतना कुलि कइल जाई तऽ मेहरारू कपारे पर ना चढ़ि, ए में मेहरारू के कवन दोस बा? पहिले एक-आध आदमी घर-जमाई रहे हो मजबूरी बस पर आजु त बिआह होते सब केहू घरजमाई हो जाता।” शामी चाचा खिसिया के बोलले।

“आज जतरा ठीक नइखे भुझात, चाय ना मिली” टुन्वा बुद बुदइलस
“अच्छा चाचा चलऽ तानि हम, खेत मे जाये के बा” टुन्वा बोलल्स।
“ठीक बा सांझी खाऽ अइहऽ तबले देवी जी आ जइहे” शामी चाचा कहले।

“ठीक बा…चल रे चन्दनवा, झुना भइवा बड़ा झूठ बोलता, गइल ह ससुरारी आ हमनी के बोलल्स ह जा तानि मोड़ प” टुन्वा हमरा से बोलल्स
दूनू जाना हमनी के बतीयावत निकल गइनी जा।

लेखक: चन्दन कुमार सिंह,
संस्थापक जोगीरा डॉट कॉम
ईमेल: [email protected]

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