किताब भोजपुरी : लोक संस्कृति और परम्पराएँ के लोकार्पण भईल पटना में

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भोजपुरी के लोक संस्कृति आ परम्परा के आलेखन से नया पीढ़ी के जुड़े के चाहीं । भोजपुरी के अथाह विरासत बा । एह विरासत से मोती निकाले के चाहीं । भास्कर कला , संस्कृति , पत्रकारिता अवरू रंगमंच के मिलल-जूलल व्यक्तित्व हवन । भोजपुरी संस्कृति के प्रसार ख़ातिर हमेशा तत्पर बाड़न”- प्रसिद्ध चित्रकार आनंदी प्रसाद ‘बादल’। मौका रहे भुनेशवर भास्कर के किताब “भोजपुरी : लोक संस्कृति और परम्पराएँ” के लोकार्पण समारोह के मुख्य अतिथि के रूप में बोले के।

श्री अरविन्द महिला कॉलेज, पटना के हिन्दी विभाग के ओर से आयोजित लोकार्पण समारोह के अध्यक्षता कइलें हिन्दी प्रगति के अध्यक्ष श्री सत्यनारायण । श्री सत्यनारायण जी कहलें – ‘ लोक संस्कृति के एकता आ ओकर संरचना के प्रतिक ह भोजपुरी संस्कृति। भास्कर आपन किताब में एगो कलाकार आ समाज शास्त्रीय के नज़रिया से लिखले बाड़न’।

कवि श्री राम तिवारी जी कहलें – ‘भोजपुरी संस्कृति में लोक जीवन के आस्था के तत्व बा । एह पुस्तक में विस्तार से वर्णन बा’ ।

एह अवसर पर विशिष्ट अतिथि अशोक कुमार जी आपन संबोधन में कहलें कि – ‘ किताब में भोजपुरी संस्कृति के संघर्ष आ सहनशीलता के गाथा बा’।

स्वागत भाषण में कॉलेज के प्रचाया प्रो॰ उषा सिंह कहली – ‘भास्कर भोजपुरी संस्कृति के दूत बाड़न । नया पीढ़ी के भोजपुरिया संस्कृति से अवगत करा रहल बाड़न’।

अंत में भुनेश्वर भास्कर आपन विचार व्यक्त कइलन आ कहलन कि – ‘हम भोजपुरी अंचल में घूम-घूम के ऊहवाँ के जीवन संस्कृति समझे के कोशिश करिला । जवन कि किताब के रूप में रउरा सभे के सामने बा’।

समारोह में पवन श्रीवास्तव, विनय कुमार, राजकुमार प्रेमी, डा॰ सरिता कुमारी , रंजित सिंह , चित्रकार पंकज सिंह ‘ सन्यासी’ आ चित्रकार कमलेश कुन्दन जईसन माननीय लोग भी आपन-आपन बात – विचार रखलस ।

एह पोस्ट पऽ रउरा टिप्पणी के इंतजार बा।

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