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भोजपुरी कविता

जगदीश खेतान जी

जगदीश खेतान जी के लिखल भोजपुरी कविता हमहूं लूटीं तेहू लूट

हमहूं लूटीं तेहू लूट। दूनो पहिने मंहग सूट। उपर वाले के भी खियाव। अपने पीअ आ उनके पियाव। अईसे जो कईले जईब त रिश्ता हरदम रही अटूट। हमहूं लूटीं तेहू...
कुमार विनय पांडेय जी के लिखल माई के करजा

कुमार विनय पांडेय जी के लिखल माई के करजा

नान्ह-नान्ह हाथ-गोड नान्हही देहिया, दिन-दिन बढल जाला तोहरो उमीरिया। घर भर करे तोहसे बहुत सनेहिया, नजर ना लागो माई-बाबूजी के कीरिया।। बाटे ना सहुर तहरा उठे-बैठे, बोले के, तवनो...
जगदीश खेतान जी के लिखल मोबाइल महिमा

जगदीश खेतान जी के लिखल मोबाइल महिमा

नया खेलवना आईल बा। येकर नाम मोबाइल बा। बजता खेते खरीहाने मे। बाग बगईचा सीवाने मे। बजता होटल मयखाने मे। आफिस मे आ जेलखाने मे। येकर अइसन नसा चढल बा येही...
डॉ राधेश्याम केसरी जी के लिखल भोजपुरी कविता सावन-सिसक गइल बा

डॉ राधेश्याम केसरी जी के लिखल भोजपुरी कविता सावन-सिसक गइल बा

ढहल दलानी अब त सउँसे, पुरवइया क झांटा मारे, सनसनात ठंढा झोका से, देहिया काँप गइल बा। मेजुका-रेवां गली- गली में, झेंगुर छोड़े मिठकी तान, रोब गांठ के अँगनैया में, डेरा...
प्रिंस ऋतुराज दुबे

प्रिंस रितुराज दुबे जी के लिखल भोजपुरी कविता मोदी आईनी काशी

मोदी आईनी काशी हई उहा कS भारत बासी भारत के मिलता पहचान अब कशी बनता भारत के शान अब कशी करे निहोरा अब भोजपुरी के सम्मान करS पूरा देश बिदेश...
santosh patel

संतोष पटेल जी के लिखल भोजपुरी कविता किसान के पिसान

आजू भारत के राजनीति में एक्के गो चरित्र रह गइल बा किसान किसान हो के / उ / हो गइल बा एगो सीढ़ी सत्ता...
प्रिंस ऋतुराज दुबे

प्रिंस रितुराज दुबे जी के लिखल भोजपुरी कविता नायका बरिस

नायका बरिस लेके आईल बहार हो नाया नाया होई हजार धमाल हो | मन के भीतरिया ख़ुशी के उमंग आकाश में चमके सतरंगी पतंग | दईब करस कुछु...
प्रिंस ऋतुराज दुबे

प्रिंस रितुराज दुबे जी के लिखल भोजपुरी कविता भारत से इंडिया ले

जवन भारत सभ्यता आ संस्कृति कऽ केंद्र होत रहे आज उऽ फूहर इंडिया हो गईल बा | जेकरा के मर्यादा आ सुनरता के जननी बुझल जात...
एगो जिनगानी

एगो जिनगानी

कबो सुख त कबो, परेशानी से गुजरल कबो आग त कबो, पानी से गुजरल कबो लड़िर्काइं त कबो,जवानी से गुजरल एगो जिनगानी, केतना कहानी से गुजरल। कबो काम...
सुजीत सिंह

सुजीत सिंह जी के लिखल तीन गो भोजपुरी कविता

बाह रे जमाना... बाह रे जमाना इ त, हद हो गइल। मेहरारू के आगे माई, रदद् हो गइल।। छोह मउगी से प्यार, माई पावे दुत्कार। माई बाटे मोहताज, मेहर मुरीया के ताज। ममतामयी...
योगेन्द्र शर्मा "योगी"

भोजपुरी कविता ससुरारी के दाना खइले

ससुरारी के दाना खइले एक जमाना बीत गयल जब से साली गईल बियह के आना-जाना छुट गयल। मनवा होखे देख के चोहर साली जब भईल लड़कोहर बईठ टवेरा घुमब केह...
जयशंकर प्रसाद द्विवेदी

कवने ओरियाँ

पीरितिया के कइसे जोगाईं जोगी जी । कवने ओरियाँ मुहवाँ छिपाईं जोगी जी ॥ बयरी बनल बाटें पुलिस दरोगवा अचके मे बढ़ल जाता प्रेम रोगवा घरी घरी देवता...
डॉ राधेश्याम केसरी जी के लिखल भोजपुरी कविता प्रदूषण क मार

डॉ राधेश्याम केसरी जी के लिखल भोजपुरी कविता प्रदूषण क मार

पेड़ कटाईल धुंआधार, धुँआ-धक्कड़ भइल अन्हार, जड़ में जहर घोलाइल जाता, सुतल मनई अब त जाग। माधो क माटी से ममता, माटी क उपजाऊ छमता, रसायन से...
डॉ राधेश्याम केसरी

डॉ राधेश्याम केसरी जी के लिखल भोजपुरी कविता आइल गरमी

सूरज खड़ा कपारे आइल, गर्मी में मनवा अकुलाइल। दुपहरिया में छाता तनले, बबूर खड़े सीवान। टहनी, टहनी बया चिरईया, डल्ले रहे मचान। उ बबूर के तरवां मनई,...
डॉ राधेश्याम केसरी

डॉ राधेश्याम केसरी जी के लिखल भोजपुरी कविता बा चुनाव क डंका बाजल

बा चुनाव क डंका बाजल, अब नेता अकुलाई। हाथ जोड़ के सबका दुआरा, दउर-दउर उ जाई। हमरा के उ आपन संगी, सबके उ समझाई। सबका हित क...
डॉ राधेश्याम केसरी

डॉ राधेश्याम केसरी जी के लिखल भोजपुरी कविता दुनिया कइसे बा फेफियात

आइल गरीबी जिनिगी आफत, उनकर खाली लमहर बात। सात समुन्दर, उनका घरवा , घी क अदहन रोज दियात। हमरा घर में कीच- कांच बा, नइखे घर में भूंसा-...
डाॅ पवन कुमार

कइसन गांव-गिरांव हो गइल

कइसन गांव-गिरांव हो गइल अजबे चलन सुभाव हो गइल। गांव शहर में बदले लागल सिमटे लागल खेतिहर धरती जाने कहां बिलाये लागल जंगल अउरी हरियर...
डाॅ पवन कुमार

भोजपुरी भासा हऽ माई के

भोजपुरी भासा के अस्मिता आ ओकरा संवैधानिक दरजा खातिर आंदोलन जारी बा। एही सिलसिला में केंद्र सरकार से अपना हक के मांग करत भोजपुरिया...
योगेन्द्र शर्मा "योगी"

भोजपुरी कविता जब से रोटी बोर खवायल

जब से रोटी बोर खवायल ओठलाली खूबै महंगायल अब का आलू खेत बोआई सबही चोखा से भरुआयल। रोटी भात न खाये अईली ओरहन बा मउगी के आयल का चाहत बा...
जयशंकर प्रसाद द्विवेदी

कइसे काम चलइहें मालिक ?

घरे - दुआरे सगरों शोर बनवा नाहीं नाचल मोर कइसे काम चलइहें मालिक ॥ हेरत हेरत हारल आँख केकर कहवाँ टूटल पांख सात पुहुत के बनल बेवस्था अब कइसे बतइहें...

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