छपरा दहात बा

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गिरत नइखे बुनी फसल सुखात बा,
गंगा जी के पानी से छपरा दहात बा।

राहत आ बचाव कार्य फाइले में जारी बा,
प्रशासनिक व्यवस्था कहे लोग भारी बा।
चिउरा आ गुड़ भाई सगरो बांटात बा,
गंगा जी के पानी से छपरा दहात बा।

एम.पी.,विधायक हवाई दौड़ा करता लोग,
पीड़ित के हक्क ला संसद में लड़ता लोग।
जनता के दुख तकलीफ ना सहात बा,
गंगा जी के पानी से छपरा दहात बा।

प्रकृति के मार से गरीब हलकान बा,
खाएके अनाज नाही रहे के मकान बा।
लूट बावे मचल हक सब के मरात बा,
गंगा जी के पानी से छपरा दहात बा।

एह पोस्ट पऽ रउरा टिप्पणी के इंतजार बा।

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