छरमतिया

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छरमतिया
छरमतिया
बड़की-बड़की आंख. धनुख लेखा तनल-तनल भौं. सुग्गा नियन उठल नाक. करिया-करिया घुंघुरूआ केस. मजगर सेनुर से भरल मांग. लिलार प सेनुरे के बड़ लाल टीका. कद साधारण. रंग गाढ़ा सांवर. देह से स्वस्थ आ चिकन-चाकन. छरमतिया आपन मुसहर टोला के एगो देखनउक मेहरारू रहे. ओकरा के जे देखे, ऊ देखते रह जाव. बाकिर केहू के ओकरा पंजरा ठेके के हिम्मत ना जुटो. बुरा नजर से देखे वालन के ऊ आंखि निकाल लेवे प ऊतारू हो जाव, चाहे ऊ अपना टोला-जवार के होकस आ कहीं बाहर के. ऊहो कवनो दोसरमरद के कबो आंखि उठा के ना देखो. ओकर मरद करिअवा ओहू ले कुच-कुच करिया. मोट भंइसा लेखा. बाकिर बाहर से ऊ जतने बदसूरत, भयावह आ कठोर रहे भीतर से ओतने दिल के साफ, सुन्नरमोलायम रहे. दूनो मरद-मेहरारू एक दोसरा के जी-जान से प्यार करस. तीस-पैंतीस के छरमतिया आ अड़तीस-चालीस के करिअवा के बिआह के बीसन बरिस बीत चुकल रहे, बाकिर छरमतिया के गोदी सून के सूने रह गइल रहे.

गांव के आ सहर के बीच सड़क के एक ओरि बसल बीस-पच्चीस घर के एह मुसहर टोली में विकास कबो झांकहूं ना आइल रहे. चारू ओर गड़हा-गुड़ही आ ओह में बरसात अउर नाला-नाली के जमकल बजबजात गंदा पानी आ जेने-तेने सुअरन के लोटत-पोटत झुंड. दारू-ताड़ी पी के मरद-मेहरारूअन के सोर-सराबा अउर गाली-गलउज त रोजे के आम बात रहे. बाकिर ओह गंदगी अउर नारकीय माहौल में रहलो प छरमतिया आ करिअवा के रहन-सहन तनी अलगे किसिम के रहे. ओहनी के झोपड़ी अउर झोपडिय़न ले साफ-सुथरा अउर तनी देखनउक लागे, ओकनी के पेन्हाव ओढ़ाव आ खान-पानो में फरक रहे. छरमतिया के खुस राखे खातिर करिअवा हर संभव कोसिस करे. ओकरा के मेहनत-मजूरी करे कबहूं जाए ना देवे. खुदे मेहनत-मजूरी करे आ जे कमा के ले आवे ऊ छरमतिया के हाथ में धर देवे. ओकर कमाई दू बेकत के खाए पेन्हे खातिर काफी रहे. छरमतियो करिअवा के दिल प राज करत रहे. बाकिर भीतरे-भीतरे माई ना बनला के दुख से ओकर मन टुकी-टुकी होत रहत रहे. ओकर कुल्हि खुशी में ओकर बांझ भइल आगि लगा देत रहे. साल-दू साल प टोला के कवनो-ना कवनो मेहरारू लरकोरी बनिए जा स. छरमतिया ओहनी के देखि के ललचि-ललचि के रह जाव. ओने छरमतिया आ करिअवा रहन-सहन, खाना-पीना आ नीमन झोपड़ी देखि के मने-मने कुल्हि मेहरारू डाह से जरत-बुतात रही स. ओकर बदला लरकोरी मेहरारू अपना-अपना लइकन के कोरा में लेके छरमतिया के देखा-देखा के मजा लेत रही स. लइकन के देखि के छरमतिया के छाती में ममता के दूध उफान मारे लागे. ऊ बिदुक-बिदुक के भीतरे रोवे लागे.

रोज लेखा आजो छरमतिया सिंगार-पटार क के अपना दुआर प सांझे से बइठ के देर राति ले करिअवा के बाट जोहलस. ढेर राति बीतलो प जब ऊ ना आइल त ओकरा मन में विसवास हो गइल कि हो ना हो आजु ऊ कवनो पिअक्कड़ संघतिया के फेरा में पडि़ गइल. ओकर छरमताह मन रहि-रहि के छरियाए लागल-आजु ऊ लवीट के आवे ना, ओकर जवन मामरहेठ करब कि उहे जानी. छरमतिया छरमताइल मन लेले झोपड़ी के भीतर ढुक गइल. खीस में दुआरो बंद करे के भुला गइल. बाट जोहत-जोहत ना जाने कब ओकरा आंखि में नीन सवार हो गइल आ भुइंए में लोंधड़ गइल.

ओने करिअवा के माथ प ना जाने का सवार रहे. खूब दारू पिअलस भट्ठी में घुस के आ एगो चुक्को में भर चुक्का राखियो लिहलस. आधा रात बीत चुकल रहे. भट्ठी वाला ओहके ठेल-ठाल के आपन दोकान बन कइलस. टसके के ऊ नावे ना ले. अमावस के अन्हरिया रात. चारू ओर अन्हार के अथाह दरिआव फइलल रहे. ना आगा सूझे ना पाछा. ऊपर से आंखि प नीसा के जोरदार असर. करिअवा टोवत-टावत अपना झोपड़ी के राह पकड़लस. बाकिर बीचे में पड़े वाला काली स्थान प आके ओकर गोड़ ठमक गइल. आंख बिदोर-बिदोर के देखलो प जब काली माई के मूरती ना लउकल त हाथ के चुक्का भुइंया राखि के फटाफट माचिस के दू-तीन गो काठी जरा-जरा के आंखि फारि-फारि के काली माई के सूरत निहरलस. ओकरा बुझाइल कि उनकर घना करिया केस के बीचे मांग में सेनुर ना खून के धार होखे आ खूने में डभ-डभ डूबल बड़की-बड़की दूनो आंख. लिलार के टीका खूने के गोल थक्का. गला में माला लागल जइसे टटका मूड़ी काट-काट के बनावल मुंडमाल होखे. मुंह के बहरी निकसल जीभ लागल कि अबहीं ले मुंह के खून सुखाइल नइखे. करिअवा खूब ध्यान से देखलस आ एक बेरी ओकरा मुंह से अनियासे निकसि गइल-जै हो काली माई … झट दे दारू वाला चुक्का मूरती के आगा फोरि के सस्टांग पटा गइल. कुछ मिनट के बाद उठि के दूनो हाथ जोरि के ठाढ़ भइलफेरु झोपड़ी के ओरि चल दिहलस. अन्हार से लड़त नीसा में बउराइल अपना झोपड़ी में घुसल. कोना में जरत ढिबरी के रोशनी में छरपतिया के चिते पटाइल देखि के डेरा गइल.

माथा के करिआ-करिआ घुंघराइल केस के झोंपा दूनो कान्ह प छितराइल रहे. मांग के गाढा सेनुर खून के लाल धार अउर लिलार के बड़ गोल लाल टीका लागल कि खूने के गोल जमल थक्का होखे. करिअवा के बुझाइल कि काली माई आपन स्थान छोडि़ के छछात छरमतिया के देह में समा गइल बाड़ी. ऊ मारे डर के पीपर के पतई लेखा लागल कांपे. बाकिर ऊ अपना के संभारत आपन माथा झटकि के अपना के समझउलस- धत्तेरे के हम केतना बुरबक बानी. भला देवी जी आपन स्थान छोडि़ के एह झोपड़ी में काहे के आवे जास. ई कुल्हि सिरफ हमार भरम ह. ऊ जब हिम्मत क के छरमतिया के पेट प के अंचरा हटवलस त ओकरा बुझाइल कि छरमतिया के छाती प से दूध के फउवारा निकली के ओकरा संउसे मुंह प छितरा गइल. ऊ पसीना- पसीना हो गइल. झट दे भरल पानी के घइली दूनो हाथ में उठा के गटागट पी गइल. गते से खिसक के बाहर जाए लागल त छरमतिया निनइले में ओकर हाथ पकडि़ लिहलस आ बुदबुदाइल-का रे करिअवा! हमरा के माई ना बनइबे का … बनबे काहे ना, ते माई जरूर बनबे…अबहीं ते निनाइल बाड़े…नीके तनी सूत ले…तले हम बहरी से हवा खा के आवतानी. ऊ गते गते ओकर हाथ छोड़ा के बहरी निकलल आ थस से बइठ गइल. छरमतिया अबहुओं बुदबुदाते रहे-हमार कसाई माई-बाप ना जाने कइसन ठूंठ आ सूखल पेड़ से हमरा के बान्ह देलन स. करिअवा के माथ से आधा नासा उतर गइल. ऊ झट से एगो बीड़ी सुलगवलस आ दनादन चार-पांच कस खींच लेलस. तब जा के ओकर नासा तनी थमल. ओकर आंखो भरमे लागल आ ना जाने कब ओकरा नीन आ गइल आ कब ऊ ओहिजे भुंइया प लोंघड़ गइल, पते ना चलल.

रोज से तनी पहिलहीं करिअवा के नीन टूटि गइल. अबहीं अन्हारे रहे, बाकिर भोर उतरे-उतरे हो गइल रहे. ठाढ़ हो के ऊ देह झरलस आ दीसा मयदान खातिर निकल गइल. फराकित होके जब लवटे लागल त अन्हार फाटि गइल रहे आ भोर उतरे लागल रहे. मैदान पार कइके जइसहीं सड़क प चढ़ल त पांचछव लोगन के जमाव देखलस. उत्सुकतावस उहो ओहिजा पहुंच गइल. एकाध गो मेहरारूओं पहुंच गइली स. सड़क के किनारे वाला बड़ गड़हा में एक ओरि कपड़ा में लपेटल एगो जनमतुआ फेंकल रहुए. अबहीं जीअते रहुए. करिअवा आव देखलस ना ताव झट से दे सड़क से गढ़ा में कूद गइल आ ओह कुलबुलात जान के झट दे कोरा में उठा के चोर लेखा खेते-खेते भाग पराइल. पाछा मुडि़ के ना देखलस. सभे ताकते रह गइल. धउरत-धउरत टोला के पिछुती से अपना झोपड़ी में घुस गइल. छरमतिया दुआर बहारत रहे. सब छोड़-छाडि़ के उहो अकबकाइले भीतरी ढुकि गइल. करिअवा झट दे केवाड़ी बन कइके छरमतिया के हाथ में लइका के धर देलस. ऊ आंखि फारि-फारि के देखलस आ चिहा के बोललस-अरे ई त जनमतुआ लइका ह गोर-गार कहीं से चोरवल ह का…? चुप! गते बोल…चोरवनी ह ना…गड़हा में बीगल रहे…अरे पगली ई त काली माई के परसादी ह….हमनी के परसदिया…दूनो मिलि-जुली के ओकर लता-लुगरी हटवलन स. नार-खेंड़ी कटलन स आ छरमतिया जइसहीं ओकरा के पोंछ-पाछ के अपना करेजा में सटवलस, ऊ केहां-केहां लागल रोवे. विधि के विधान-छरमतिया के छाती से दूध उमडि़ के लागल ढरके. ऊ चट से आपन छाती ओकरा मुंह में धरा देलस. गाय के जनमतुआ बाछा लेखा लइकवा चपर-चपर लागल पीए. छरमतिया हुलसि के कहलस करिअवा! देख ना रे, हम माई बनि गइनी. करिअवा छाती तान के मुस्किया देलस.

देखते-देखते परसदिया सात-आठ साल के हो गइल. बाकिर ओकर देह-धवासा देख के लागे कि ऊ दस-बारह बरिस के होखे. ओकर पढ़ाई-लिखाई आ तेज बुद्धि देख के माहटर लोग हैफ खासु आ हैरान रहसु. एक दिन एगो हाथ देखे वाला पंडितो हाका बान्हि के भाभि बानी सुना गइल-अरे, ई त बहुते बड़ आदमी बनी…एम.एल.ए. मनीस्टर बनी… करिअवा के छाती फूल के चौड़ा हो गइल. बाकिर छरमतिया के मन भीतरे-भीतरे अंइठा गइल-परसदिया बड़का आदमी बन जाई…एम.एल.ए. आ मनीस्टर बनि जाई. हमरा के छोड़ के चल जाई… पंडित के बानी से ओकरा करेजा मे धक्का लाग गइल. ओकरा माथा में पंडितवे के बानी नाचे लागल. सोचते-सोचते एक दिन राति के सपना देखलस कि परसदिया सांचो मनिस्टर बनि के टोला छोडि़के अकेले सहर निकलि गइल. लमहर-लमहर भाखनो दिहलस-हम एह मुसहर टोली के सरग बना देब. इसकोल, हस्पताल,पक्का मकान, बिजुली-पानी, नाला-सड़क सभ कुछ हम देहब.

ठीक ओइसहीं जइसे सभ नेता लोग बोल के चल जाला आ फेरू लवटि के ना आवे. परसदियो लवटि के ना आइल महीना आ बरिस बीत गइल. लोग-बाग जब ई कहे लागल कि-जवन आपन माई-बाप नियन करिअवा आ छरमतिया के ना भइल, ऊ भला केकर होई. आखिर फेंकुए लइका नू रहे. आपन कोख के रहे थोरे! लोग के करूआ बोली ओकरा करेजा में तीर लेखा लागि गइल. ऊ एक दिन बिना केहू के बतवले उनमुनाहे सहर के ओरि निकल गइल. खोजत-खाजत ऊ परसादी राम मनिस्टर के बंगला के गेट प ठाड़ होके संतरिअन प कड़क के हुकुम चलवलस-गेट खोल लोगिन, हमरा आजु परसदिया से भेंट करे के बा. संतरियन सभ एक बेरि ओकरा के भौचक हो के देखलन स. आ फेरू ठठा के लगलन स हंसे-पागल समुझि के भगावे लगलन स. बाकिर छरमतिया एकदम से डटल रहे. गेट प हल्ला-गुल्ला आ बकझक सुनि के सामने बरंडा में बइठल परसादी राम आ गइले. छरमतिया सिकायत कइलस-देख ना परसदिया, ई सब तोरा से नइखन स मिले देत. ई सभन के निकाल बाहर क दे. परसादी राम एक बेरी छरमतिया के गौर से देखलन. फेरू नजर फेरि के कहलन-सांचो ई पागल बिया…लागता भुखाइलो बिया…जा स एकरा खातिर कुछ खाय के देके रफा दफा क द स. छरमतिया उनुका के बघुआ के देखलस बाकिर कुछ कहलस ना. तुरंते एगो पत्तल में हलुआ-पुरी आ गइल. छरमतिया हाथ बढ़ा के लेइओ लिहलस. बाकिर ओह हलुआ पुरी प दू-तीन बेर थूकि के गेट के सटले बइठल बाघ नियन कुकुर के आगा फेंक दिहलस आ गेटे प थू-थू कइके तीन-चार बेरी थूक के चलि दिहलस पाछा मुडि़ के देखबो ना कइलस.

अरे थूक काहे फेंक तारे रे छरमतिया सउसे देह थूके-थूक हो गइल. गमछा से देह पोछत करिअवा पूछलस.कवनो सपना-ओपना देख रहस का. हं सपने देखत रहीं, बड़ी खराब सपना. छरमतिया बतवलस. जाय दे सपने नू रहे, कवनो सांच ना नू…अब महटिया के सूत करिअवा समझवलस. बाकिर ओकरा आंखि में नीन कहां रहे. ऊ टुकर-टुकुर झोपड़ी के छत देखत रहि गइल. बिहान भइला ओकरा के कतनो उठावल गइल, ऊ ना उठल. परसदिया दउर के एगो डॉक्टर के बोला लाइल. डॉक्टर जांच के कहलन-एकरा कवनो भारी सदमा लागि गइल आ ओकरा के मृत घोषित कई दिहलन. परसदिया पछाड़ मारि के छरमतिया के छाती प लोट-लोट के लागल रोवे. करिअवा के कठमुरती लागि गइल आ माई बनि के मुअल छरमतिया के आंखि फारि के लागल देखे.

–सतीश प्रसाद सिंहा

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