लाल बिहारी लाल जी के लिखल भोजपुरी गीत दीया खुशी के जलाव

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घरे-घर खुशियां मनाव, दीया खुशी के जलाव
घरे-घर खुशियां मनाव, बात अब ई फइलाव
धरा बचावे खातिर बबुआ, अब त तूआगे आव
अब ना छोड़ बम पटाखा, कीरिया आजउठाव
दुखियन के गले लगाव… दीया खुशी के जलाव
घरे-घर खुशियां मनाव……….

ना खाएब, मेवा मिठाई, ना खाएब बाजार के
आपन घरे बनाएब आज, रोकब भ्रष्टाचार के
बिजली के खूब बचाव… दीया खुशी के जलाव
घरे-घर खुशियां मनाव………..

दीन दुखी गरीब के साथे, बाटंम खुशियां दू चार
जेतना संभव होई भइया, देहब हमलार दुलार
बूढवन के गले लगाव… दीया खुशी के जलाव
घरे-घर खुशियां मनाव………..

लाल बिहारी लाल के जग में ई हेबा पैगाम
आपन जिंनगी गैर के खातिर क दिहलेनिलाम
जग में कवनो दुखिया हंसाव, दीया खुशी के जलाव
घरे-घर खुशियां मनाव……..

एह पोस्ट पऽ रउरा टिप्पणी के इंतजार बा।

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