कन्हैया प्रसाद तिवारी जी के लिखल एगो गरीब के बिटिया के दर्द

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का कहीं सुन्दर सुहाना सेज सूना रह गइल
दिल के बतिया दर्द बन अँखिया के राहे बह गइल

जन्म से जहमत रहीं हम जश्न ना देखनीं कबो
जहर जस पियनी पसीना बात ना कहनी कबो
बाप के तन काँट भईल पैर पनही ढ़ह गइल ।
दिल के बतिया दर्द बन अँखिया के राहे बह गइल

का बताईं दर्द आपन समय बड़ बलवान बा
हाथ जेकरा दाम नइखे उ दूषित इंसान बा
आँख के पुतरी पिता की जाके ससुरा जह गइल ।
दिल के बतिया दर्द बन अँखिया के राहे बह गइल

काठ के कइलऽ करेजा हाथ ना कांपल कभी
गाँव के अगुआ अकेला भाव ना भांपल कभी
दाम खातिर चाम चुसलऽ चलन बाउर रह गइल ।
दिल के बतिया दर्द बन अँखिया के राहे बह गइल

ऐ रसिक ! मरहम लगावऽ बालिका के जख्म पर
दोसताना मत चलावऽ पापियन के जश्न पर
बाप के दुलरी धिया ससुरा में गम के गह गइल
दिल के बतिया दर्द बन अँखिया के राहे बह गइल

संभार : कन्हैया प्रसाद तिवारी रसिकजी के फेसबुक पेज से

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