कल्पना पटवारी जी के गावल छठ के एगो बेहतरीन गीत

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पिछले साल तक मुझे पता नहीं था कि महात्मा गाँधी का सत्याग्रह आन्दोलन बिहार की पावन धरती चम्पारण से शुरू हुई थी….
यह बात पता लगने पर मैं सांगीतिक श्रद्धांजलि के रूप में “चम्पारण सत्याग्रह” नामक ऑडियो-विजुअल तैयार करना जरूरी समझी…
महज दो महीने पहले प्रख्यात निर्देशिका और मेरी प्यारी सहेली श्रुति वर्मा से मुझे पता लगा कि बिहार में कई वर्षों से सिर्फ हिन्दू ही नहीं बल्कि मुसलमान भी छठ व्रत करते हैं…
यह सुनकर मैं चकित और हैरान रह गयी… बिहार के उन मुस्लिम महिलाओं को चरण स्पर्श करने को जी चाहा…और एक स्त्री के रूप में यह सहज एहसास हुआ कि एक बांझ की कोई जाति या धर्म नहीं होता है…
ये समाज का दिया हुआ एक ऐसा असहनीय गाली है जो हर जाति-धर्म के स्त्री को आस्था के अलग-अलग दरवाजों के सामने नतमस्तक होने को मजबूर कर देती है.. और छठ मैया हर धर्म के स्त्री की व्यथा को सुन भी लेती हैं.. बहुतों की गोद भी भर देती हैं….
मेरा बिहार सर्वधर्म सम्मेलन का पावन स्थान है, देश के लिए एक अनोखा मिसाल है.. मेरा बिहार ही मेरे जीवन का आधार है…

Fantastic Chhath Geet song by Kalpana Patwari ji.

एह पोस्ट पऽ रउरा टिप्पणी के इंतजार बा।

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