सुनील प्रसाद शाहाबादी जी के लिखल गाँव के झुमकी

0
68

नाम ओकर झुमकी रहे गाँव मे चमर टोली के अँजोरिया,भगवान के गढ़ल सुंदर कृति बारहवीं में जिला भर में टाप कइला के बाद सउँसे जवार में ओकर आ ओकर परिवार के चरचा सबके ओठ पर आ गइल रहे,बाकी एह चरचा मे जार-जरsउअल अधिका होखे काल्हु साहजी के दुकाने प रामनरेश सिंह इहाँ त कहलन की ई चमार के बेटी होइए ना सकेले जरूर शुकुल परिवार के कवनो नाजायज नतीजा हिअ।

काल्हे विडियो बाबू जरे ब्लाक के अधिकारी लोग आइल रहे आगे के पढ़ाई खातिर छात्रवृति सरकार से दिआवे के बात कहिके गइल हा लोग हरखू चमार लगे ओह लोग के पानी पिआवे के खातिर बतासा किने के पइसा ना रहल ह झुमकिया आपन चाचा से हरमुनिया बजावे के भी सीख लेले रहे जब उ कवनो लोक धुन हरमुनिया पर बजावे गावे त आवत जात लोग के डेग बन्हा जात रहल हा। समरिध घरन के लइकिनी लेखा क्रीम पावडर लगावे के हैसियत ना रहे ना हीं किसिम किसिम के बसतर तबहूँ सहजे झुंड में रहले के बाद भी केहू के आकरसित करे वाला मोहकता ओकरा चेहरा में रहे चंचल जइसे हिरनी के आंख चाल जइसे बलखात नदी चेहरा पे लट जइसे शैसव में नागिन होखsसन।

लगभग हर टोला के नवहीन के कामातुर नजर ओकरा के चिरत रहेला जेकर उ आदी हो चुकल रहे।हरखू कई हाली ओरहन लेके कई दुआरी प पहुँचल रहन बाकी कवनो लाभ ना, इहाँ तक की मुखिया सरपंच तक बात गइल त जबाब मिलल की “देख हरखुआ, तोर आ तोर पटिदारन के खेवा खर्चा एहि लोग के जमीन प काम कके चलेला अब एहि लोग से पंगा लेवे त तोरा गाँव छोड़े के पड़ी दू बीघा जमीन में डेढ़ बीघा रेहन बा उहे शुक्ला जी लगे ओकरे लइका नु चार पांच दिन पहिले बागी में लकड़ी बिनत समय हाथ धइले रहे एह बाभनन के धन बढ़ला के कारन मन बहुते बढ़ गइल बा कुसुमी खातिर एस. पी दामाद का मिल गइल एह घरी आपना के गाँव के जज समझे लागल बाड़न सँ देखलिसा सा नु चिलरा के, सात बीघा जमीन के रजिस्ट्री लेके अलाक ब्लॉक के चक्कर काटत रह गइल खाली दाखिल खारिज नइखे भइल इ बाभन दखल कके बइठल बाड़न स पिछला बीस साल के दाखिल खारिज खातिर पचास हजार माँगत बाड़ सँ जेकरा खाये के ठेकान नइखे कहाँ से दीं कय हाली ओकरा से कहनीं धरीक्षण सिंह लेखा बदमाश आदमी लेवे प तैयार बा बेच दे उ अपने दखल क ली ओकरो ममेरा भाई विधायक हs आ मौसा जिला कोरट में पेशकार ओकर अकड़ के आगे ई लोग पासंग में नइखन बाकी ना, पंजाब में जाके मजूरी करत बा आ ओकर जमीन प ई बाभन ऐश करत बाड़न सँ।

बाबू साहेब” हरखू हाथ जोड़के कहलें”राउर भी त राजनीति में प्रशासन में इदिमी बइठल बा तब रउआ न्याय काहे नइखीं करत सब दोष पंडीजी लोग के बा राउर नइखे हमार खेत के कागज भुला गइल राउर प्रवेश सिंह ब्लॉक से रजिस्टर में से पन्ना फरवा के हमार जमीन प कब्जा कइले बाड़न अफसरन के नोट खिआ के खैर ई बेटी और इज्जत के सवाल बा हम कवनो हद तक जायब सरपंच जी।

त जो एहिजा का हाथ जोडलें बाड़ीस पुलिस में कम्पलेंट करवाउ बाकी का होइ उल्टे कवनो मामला में फसा दिहन सन दामाद ओकर एस.पी बा जानत बाड़ीस नु।सरपंच के तीखा आवाज सुनके हरखू लौट आइल रहन उनुका कुछ सूझत ना रहल हा।

चचा ब्लॉक गइल रहीं जाति प्रमाण खातिर त बीडीओ साहेब हई फारम देले हाँ कहलें हाँ कि जल्दी से भरवा के सरपंच के मोहर लगवा के उनुका आफिस में जमा करवा देस ताकि झुमुकिया के स्कालरशिप समय से मिले लागो” ई बेचन पासी के लइका रहे सातवीं पास बेचारा के बाप के अवध सिंह अइसन दारू के लत लगवलें की घर के बरतन भाड़ बेच के पी गइलें आ माई बेचारा के असमय कुफुत आ बेमारी से मर गइल, दू बहिन में एगो के विआह कइलस एगो कुँआरे बिआ बाप के सब जमीन दारू के उधार अउर सूद में अवध सिंघवा लिखवा लिहलस ओकर अवैध दारू के कारोबार धड़ल्ले से एह गाँव मे चलेला केहू के मजाल की खोंख भी दे दुआरी प जुआ दिन रात खेलावेला थाना पुलिस से सेटिंग बरिआर बा ओकर, बेचना अब बीमार रहेला अबे तबे के नौबत आ गइल बा इ लइका बहुत पइसा इनका इलाज में लगा देहलस अब डॉक्टर हाथ खींच लिहलन सँ बेचारा कोइरिन से साग सब्जी किन के शहर ले जा के बेचके आपन मुशकिलन गुजारा करत बा, कहेला की बस बहिन के बिआह हो जाइत त हमहूँ कहीं बाहरा निकस जइतीं।

हरखू कान्ह के गमछा से मुँह पोछलें आ घर के ओर चल दिहलें घर के बहरी बड़ा पुरान नीम के पेड़ रहे ओकरे नीचे भर गरमी हरखू के चौकी लागल रहेला अगल बगल के घर के भी खटिया चटाई बिछा के पेड़ के नीचे पड़ल रहेला लोग कोई तास लेके त कोई दुनियादारी के बहस लेके कहे के माने की एहिजा दस लोग जुमल रहे लें।

हरखू भी जाइके आपन चौकी प ओठन्ग गइलें झुमुकिया ए झुमुकिया एक लोटा पानी आ तकेया लेले आउ थोड़े देर में झुमुकिया सब लिया के बाबु लगे हाजिर कइ दिहलस “खाना ली आईं? झुमुकिया पुछलस।

ना थोड़ा आराम कके खाइम हाँ हई फारम भर लेबे नू?देख तs”कुरता के जेब से गोलिआवल फारम सावधानी से निकाल के झुमकिया के दिहलें।
बाबु!उ का.. ह.. की. आज फेर रजनीशवा राही में उल्टा सीधा बोलत रहे अब हमरा से बरदास नइखे होखत अब त हम आज एहसे कुछ ना बोलनी हाँ की एक हाली तहरा से कह दीं तब एकनी के जबाब दीं।

ए चौक के हरखू उठलें ना ना बिल्कुल ना हम देखत बानी नु का करे के बा ते ओकनी जरे कवनो रार जन बेसहिहे हम फेरा में लागल बानी हम कुछ करब तू ओकनी से बिल्कुल मत लगिहे साथे तोरा अउर लइकी भी रहेली स नु?

ना बाबु सब रजपूती टोली के हई सन हमरा से आगे चाहे पीछे चलेली सन आउ ना त कवनो लइका कहुचावेला त हँसेली सन।
इ रजनीशवा रामायन सिंह के लइका नु ह? कबो बाभन कबो बाबू साहब के लइका इ बड़कन के का हो गइल बा अबहीं आवत बानी रामायण के दुआरी से।
खाना त खालs बतिया लिह बाद में हम खाएके ले आवत बानी।”
रुक! हम आके खाएब आवतानी कह के गमछि कन्हा प रख के रजपूती टोला के ओरी हरखू चल दिहलें रामायण आपन दुआरी प ही मिल गइलें आपन ट्रैक्टर पोछत।
मालिक परनाम
हाँ परनाम परनाम, का ह रे हरखुआ का बात बा?
मालिक बैठ जइतीं त बतिवावे में ठीक रहीत।
चल”पास ही रखल खटिया प रामायण बइठ गइलें कुछ दूरी बनवले हरखू जमीन प बइठ गइल रहे।
मालिक राउर लइका रजनीश आज हमरे लइकी झुमुकिया के राही में तंग कइलख खा।

ओह तs ओरहन लेके आइल बाड़ीस का कइलख खा नंगा या बलात्कार का कइलख खा? केहू सीटी मार देलस,टिटकारी मार देलस बस मुँह उठवले ओरहन लेके भर गाँवे घुमत रह जब एह सब से परहेज बा त काहे कवलेज भेजs तारिस ओकर कवलेज गइल बंद कर कवनो लइका देख के बिआह कर एह गाँव से निकाल ओकरा के उ आपन रूप रंग से पूरे गाँव भर के नियत खराब करत बिआ समझले?

मालिक अबहीं उ पढ़त बिआ सरकार भी ओहके सहायता करे बदे खाड़ बिआ हम बिआह कके ओकर जिनगी खराब क देईं अभी त उ नाबालिग बाड़ी बिआह कइसे कदीं?अभी त ओकर खेले खाएके दिन हs मालिक” हरखू दूनों हाथ जोड़ के गिड़गिड़ाइल।
का तोरे एगो नाबालिग लइकी के बिआह होइ? हम कइनिहां।

सउँसे गाँव मे पचासन लोग कइले बाड़न सभे बुरबक बा तेहीं कानून के पुजारी बाड़ीस चल जो भाग एहिजा से हमार माथा जन खराब कर जो जवन करे बा कर लिहे हमरे एगो लइका तोर बेटी के छेड़ले बा सारा गाँव के लइका ओकरा के देख के टिटकारी मारेलन सँ ओरहन खातिर हमरे दुआर भेटाइल हा? कवना के बहकइला में परल बाड़ीस कहीं बभनन के कहला में त ना,जो उनहूँ के कह दिहे जवन उखड़े के बा रामायण के उखाड़ लिही लोग चल भाग एहिजा से।

बेचारा हरखू हवाक परेशान रामायण के मुँह ताकत रह गइल रहे ओकरा रामायण से ई आसा ना रहे उ सोचले रहलन की रामायण आपन बेटा के डाँट दिहे आ सब ठीक हो जाई।उ गते उठके आपन घर के राह धइ लिहलें।
दुआर प अइले के बाद चुपचाप आपन चौकी प आंख मुद के ढहना गइलें।

ए हरखू का हो का करत बाड़?हरखू हड़बड़ा के आंख खोली के देखलन सामने टेकु बाबा रहलें टेकु बाबा एहि टोला के रहे वाला रहन काफी समय ओझाई गुनाई में बितला के बाद अब योगी हो गइल रहन साल में दस महीना बहरी माँगत खात घुमंतू जिनगी बितावस एह घड़ी घरे आइल रहलन।

आईं बाबा आईं” उठी के बइठत हरखू कहलें।
टेकु बाबा बइठ गइलें “का बात बा बड़ा चिंतित लउकत बाड़े हरखू ?”

हरखू सारा बात टेकु बाबा के बतवलें”देख हरखू ई गाँव मे हम बहुत कुछ देखले सहले बानी इशरदेला के हाल त तेहूँ देखले रहीस पुकार ठाकुर नाइ के लइका के बेचारा बी.ए कइके ओकरा रेलवे में नौकरी भी मिलत रहे बाकी ओकरा त पढ़े के भूत धइले रहे एमे करब का भइल भरल जवानी में जहर दे दिआइल ओकरा के।

बाबा ईशर के डाइन मरले रहे नू?हरखू आसचरज से पुछलें।

सउँसे गाँव इहे जानेला आ कहेला हमहूँ,बाकी हम ओझा हईं सारा सच्चाई जानत बानी डाइन के भूत के सब भरम हs बबुओ ओकरा के जहर देके मारल गइल रहे जवन समाज तोरा के खाटी ना एक गिलास पानी ना दे सकेला उ कइसे बरदास्त करी एक त तोर बेटी के खूबसूरती पूरे गाँव प भारी पड़sता ओह पे एकर गुन सउँसे जवार में हल्ला मचवले बा अइसन प्रतिष्ठा के एक मात्र अधिकारी एह गाँव के पंडीजी आ बाबूसाहब लोग बा तोर लइकी के भी कवनो षड्यंत्र के शिकार होखे के पड़ी आज ना त काल ते बात मान ले कवनो लइका देख के ओकर बिआह कर दे बस, गंगा नेहाले बाबुओं हमरा संकेत ठीक नइखे लागत।

बाबा…हरखू के मुँह से अतने निकलल रहे फेर मुँह बन हो गइल शायद हरखू के बाबा के बात समझ मे आ गइल रहे तबे झुमकिया हाथ मे खाएक लेले घर से निकल के चौकी प रख देहलस”हम ओहि घरी कहनीं की खा के जा केतना देर से अइलs हा हमार बात त बस माने के हीं नइखे टेकु बाबा रउवा भी खाएब ले आईं?

बाबा से पहिले ही हरखू कहले हाँ बेटा ले आव बाबा भी खइहें झुमकी पलट के दउड़ गइल थोड़े देर में टेकु बाबा के खाएक निकाल ले आइल दूनों जाना गते गते खाए लागल झुमकी बेना उठा के डोलावे लागल “रहे दे बेटी झुरु झुरु हवा त बहते बा तू काहे मेहनत करे लगलू” टेकु बाबा झुमकी के कपार प हाथ फेरत कहलें”

खाईं ना बाबा हम हवा खातिर नइखीं हाकत खाना प माछी बइठ जइहन सँ जानsतानी ओह से केतना बेमारी फइलेला।”
ना अब तोहरा अतना हम थोड़े पढ़ल बानी हम कइसे जानब?”टेकु बाबा हँसत कहलें।

खाना खत्म हो गइल रहे झुमकी थारी गिलास उठा के ले गइल थोड़े देर के बाद फेर आ गइल”बाबा हइ फारम भर दिहनीं सरपंच साहब से एहिजा साइन आ मोहर लगवावे के बा आ एहिजा तू अंगूठा लगा दीहs।”

दे हेने जो ते हम करा लेव झप से झुमकी के हाथ से फारम लेके हरखू जइसे तइसे मोड़ तकेया त घुसिआ दिहलें”जो अब!” हरखू अनसा के कहलन।
झुमकी बिना अनस प धेयान देले डेगडेग कूदत चल गइल।

अइसे ना हरखू जवन करेके बा सोच समझ शांति से करs अनसा के ना, अच्छा आराम करs हम चलत बानी सोच के बतइह हम तहरा जरे बानी जइसे कहब कइल जाई जतना सहयोग होइ हम करेब। कहके टेकु बाबा उठके चल दिहलन।

टेकु बाबा के जाते हरखू आंख बन कके सोच में डूब गइलें बहुत देर तक एके करवट पड़ल शांत मुरदा लेखा बस आंख से बहत लोर आ ताकेया के खोली के गीलापन उनकर जीवित अवस्था के बखान करत रहे धीरे से कपार उठा के हाथ से झुमकिया के भरल फारम तकेया के नीचे से निकाल लिहलन फारम भी एक कोना से भींज गइल रहे फारम दूनों हाथ से धके फारे में का जाने कतना जोर लागल होइ हरखू के, टुकि टुकि कके फेकला के बाद एतना हांफत रहलें जइसे मीलो दौड़ला के बाद बइठल होखस।

एह पोस्ट पऽ रउरा टिप्पणी के इंतजार बा।

Please enter your comment!
Please enter your name here

three × four =